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कुंकुमार्चन क्या है और कैसे करें | देवी उपासना पवित्र पूजा विधि | कुमकुम अर्चना

moti singh Rathore

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कुंकुमार्चन क्या है और कैसे करें | देवी उपासना पवित्र पूजा विधि | कुमकुम अर्चना

53 просмотра · 1 дн. назад
moti singh Rathore
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✍️ 🌺 #कुंकुमार्चन_क्या_है_और_कैसे_करें 🌺 कुंकुमार्चन क्या है? देवी-उपासना की पवित्र एवं प्रचलित पूजा-विधि है, जिसमें साधक इष्ट देवी-देवता का ध्यान और नामजप करते हुए कुमकुम श्रद्धापूर्वक अर्पित करता है। श्रीविद्या, महालक्ष्मी, दुर्गा, त्रिपुरसुन्दरी में विशेष महत्त्व। छोटी-छोटी चुटकियाँ प्रतिमा, चरणों, पूजास्थल अथवा यंत्र पर अर्पित। अष्टोत्तरशतनामावली एवं सहस्रनामावली प्रत्येक नाम के साथ। 8 चरण सरल विधि: 1. स्नान स्वच्छ वस्त्र शुद्धता 2. पूजास्थल स्वच्छ प्रतिमा/चित्र/यंत्र स्थापित 3. सामग्री: दीप, धूप, पुष्प, जल, कुमकुम 4. इष्ट ध्यान प्रणाम संकल्प - मैं श्रद्धा से कुंकुमार्चन करता/करती हूँ 5. सामान्य पूजन देवी नाममंत्र जप 6. कुमकुम अर्पित स्वच्छ उँगली/छोटी चम्मच से 7. प्रत्येक नाम पर थोड़ा कुमकुम 8. अंत: पुष्प, नैवेद्य, प्रार्थना मंत्र (सरल): ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। ॐ दुं दुर्गायै नमः। ॐ श्रीमात्रे नमः। ॐ सरस्वत्यै नमः। संख्या: 11 संक्षिप्त नित्य, 21 सामान्य, 51 विस्तृत नामार्चना, 108 नियमित जप-अर्चना प्रचलित, 251/500 समय/पर्व विशेष, 1000/1008 विशेष पर्व नवरात्रि। प्रतिमा पर क्रम: चरण → नाभि → हृदय → कंठ → मुख → मस्तक - चरण समर्पण से दिव्य स्वरूप ध्यान यात्रा, कुंडलिनी से सहस्रार प्रतीक। यदि धातु/पत्थर मूर्ति पर नुकसान हो तो सामने छोटे पात्र में अर्पित करें। श्रीचक्र / यंत्र - प्रतीकात्मक ध्यान: भूपुर (बाहरी चौकोर) - चरण आधार प्रवेश मर्यादा - भाव: हे देवी पावन चरणों में समर्पित मध्य त्रिकोण - सृजन शक्ति नाभि दिव्य शक्ति अभिव्यक्त - हे जगज्जननी संपूर्ण सृष्टि आपकी शक्ति अष्टदल/षोडशदल कमल - हृदय करुणा प्रेम कृपा - हे महालक्ष्मी हृदय पवित्र कीजिए बिंदु केंद्र - परम एकत्व सहस्रार परम शक्ति समर्पण - हे परमेश्वरी आप ही मूल तत्त्व यदि यंत्र रेखाएँ ढक सकती हों तो सामने पात्र में अर्पित करें। विधिवत् श्रीविद्या नवावरण पूजा गुरु-परंपरा क्रम। सावधानियाँ: शुद्ध प्राकृतिक कुमकुम त्वचा सुरक्षित एलर्जी हो तो बंद करें, स्वच्छ उँगली/चम्मच आँखों में न जाए, गीला/दूषित कुमकुम तुरंत हटाएँ स्वच्छता जरूरी, प्रतिमा/यंत्र गीला न करें। शुभ दिन: शुक्रवार महालक्ष्मी, मंगलवार दुर्गा शक्ति, पूर्णिमा विशेष प्रार्थना नवरात्रि 1008 अर्चना, लक्ष्मी पूजन गुरु पुष्य। लाभ: मन शांति एकाग्रता श्रद्धा-भक्ति विश्वास वृद्धि, सुख शांति समृद्धि प्रार्थना, आत्मबल सद्बुद्धि कार्य सफलता। प्रसाद: थोड़ा कुमकुम माथे तिलक/मांग में या तिजोरी में सुरक्षित - मंगल-सौभाग्य प्रतीक। अधिक हो तो स्वच्छ स्थान सम्मानपूर्वक विसर्जन, कृत्रिम रंग नदी/पौधे में न डालें। कौन कर सकता? स्त्री-पुरुष गृहस्थ विद्यार्थी सभी श्रद्धालु। विशेष तांत्रिक साधना हेतु गुरु परम्परा निर्देश आवश्यक। सारांश: श्रद्धा + समर्पण = मन शांत सद्बुद्धि समृद्धि। उद्देश्य बाहरी पूजा नहीं भीतर श्रद्धा करुणा धर्ममय जीवन। नमो नारायणी • जय माता दी • श्रद्धा से करें फल श्रद्धा पर। #Kumkumarchan #Kunkumarchana #ShriVidya #Mahalakshmi #DurgaUpasana #ShriYantra #ShriChakra #bhakti #rathorebhinchari #jaishriram