Перейти к содержимому

माई वृद्धाश्रम निराश्रित माताओं को जीवन का सहारा, ममता की गर्माहट और सम्मान के साथ जीने की नई उम्मीद

mai Vridhashram

0:00 / 0:00

माई वृद्धाश्रम निराश्रित माताओं को जीवन का सहारा, ममता की गर्माहट और सम्मान के साथ जीने की नई उम्मीद

15 просмотров · 10 дней назад
mai Vridhashram
54 подписчика
15 просмотров · 10 дней назад
जहाँ रिश्तों की कमी खत्म होती है… वहाँ ममता की छाया मिलती है! ‘माई वृद्धाश्रम’ निराश्रित माताओं को जीवन का सहारा, ममता की गर्माहट और सम्मान के साथ जीने की नई उम्मीद छत्रपति संभाजीनगर : जीवन के संध्याकाल में इंसान को सबसे अधिक जरूरत पैसों की नहीं, बल्कि अपनापन, सहारा और दो प्रेमभरे शब्दों की होती है। लेकिन कुछ माताओं से नियति ने यही मानवीय साथ छीन लिया होता है। बच्चे होते हुए भी अकेलापन, रिश्तेदार होते हुए भी सहारे का अभाव और जीवन के अंतिम पड़ाव पर आ खड़ा हुआ निराश्रित जीवन… ऐसे दर्दनाक वास्तविकता पर ममता की फुहार बरसाने का कार्य ‘माई वृद्धाश्रम’ कर रहा है। वृद्धाश्रम नहीं… ममता का घर! ‘माई वृद्धाश्रम’ में प्रवेश करते ही सबसे पहले स्वच्छता, अनुशासन और अपनत्व का एहसास होता है। सुसज्जित इमारत, आरामदायक पलंग, आवश्यक सुविधाएँ, मनोरंजन के लिए टेलीविजन तथा सभागार जैसी सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध हैं। पलंग पर आराम करती माताएँ, एक-दूसरे से बातचीत करते उनके चेहरे, उनकी देखभाल और हालचाल पूछते सेवाभावी हाथ तथा समय-समय पर उनसे मिलने आने वाले परिजन और दानदाता… यह सब देखकर महसूस होता है कि यहाँ केवल आश्रय नहीं दिया जाता, बल्कि खोए हुए परिवार जैसा अपनापन देने का प्रयास किया जाता है। एक निवाले में भी होती है ममता की मिठास… बुढ़ापे में समय पर मिलने वाला भोजन, स्वास्थ्य की देखभाल और आराम जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है कोई ऐसा व्यक्ति जो प्रेम से उनका हाल पूछे। ‘माई वृद्धाश्रम’ में माताओं को नियमित भोजन, चाय-नाश्ता और दैनिक आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। विभिन्न सेवाभावी व्यक्तियों, संस्थाओं और दानदाताओं के सहयोग से यह सेवाकार्य निरंतर जारी है। कोई दानदाता माताओं को भोजन कराता है… कोई उनकी जरूरत की वस्तुएँ देता है… कोई उनके स्वास्थ्य की चिंता करता है… तो कोई केवल कुछ पल उनके साथ बैठता है… माताओं के लिए शायद यह एक छोटी-सी पहल होती है; लेकिन उनके मन के लिए यही सबसे बड़ी ममता की सौगात बन जाती है। ‘माँ’ को सहारा देना यानी समाज को इंसानियत देना आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में वृद्धावस्था की ओर कई बार उपेक्षा से देखा जाता है। लेकिन जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार, बच्चों और समाज के लिए समर्पित कर दिया, उन वृद्ध माताओं को जीवन के अंतिम पड़ाव पर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिले, यह केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है—यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इसी सामाजिक भावना के साथ ‘माई वृद्धाश्रम’ अनाथ, निराश्रित, बेघर एवं वंचित वृद्ध माताओं को सहारा देने का कार्य कर रहा है। आपकी छोटी-सी मदद… किसी माँ के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकती है! इस सेवाकार्य के लिए समाज के दानदाताओं, सामाजिक संस्थाओं और संवेदनशील नागरिकों के सहयोग की आवश्यकता है। अन्न-धान्य, कपड़े, दवाइयाँ, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ अथवा आर्थिक सहायता—आप अपनी क्षमता के अनुसार जो भी सहयोग करेंगे, वह किसी माँ के जीवन में ममता का एक दीप जला सकता है। क्योंकि… वृद्धाश्रम में रहने वाली वे केवल ‘माई’ नहीं हैं, वे किसी की माँ हैं… किसी की मौसी हैं… किसी की दादी हैं… और सबसे महत्वपूर्ण बात— वे हमारे समाज का एक अभिन्न हिस्सा हैं। इसलिए ‘माई वृद्धाश्रम’ का संदेश सरल है— “जिन्हें दुनिया ने सहारा नहीं दिया, उनके लिए हम सहारा बनें… उनके जीवन की संध्या में ममता का एक दीप जलाएँ!” माई वृद्धाश्रम जन सेवा ही ईश्वर सेवा 📍 गली नं. ८, आनंदनगर, पंडित नेहरू कॉलेज के पीछे, गारखेडा परिसर, छत्रपति संभाजीनगर आइए… एक कदम ममता की ओर बढ़ाएँ। आपकी एक मुलाकात, आपकी सेवा और आपका सहयोग—किसी माँ को फिर से ‘अपना कोई’ होने का एहसास दे सकता है। ❤️