लक्ष्मी नारायण मंगल स्तुति 🙏 | ॐ नमो नारायणाय | सुख-समृद्धि एवं शांति मंत्र | Lakshmi Narayan Bhajan
Bhakti Dhuni Bhajan
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लक्ष्मी नारायण मंगल स्तुति 🙏 | ॐ नमो नारायणाय | सुख-समृद्धि एवं शांति मंत्र | Lakshmi Narayan Bhajan
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लक्ष्मी नारायण भजन — मंगल स्तुति: शुक्रवार और शुभ अवसरों पर सुनने से मन को शांति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना का भाव मिलता है।
🙏 जय लक्ष्मी नारायण 🙏
क्षीरसागर में शेषशय्या पर विराजे भगवान नारायण और उनके साथ माँ लक्ष्मी, यह जोड़ी सुख, धर्म और समृद्धि के संतुलन की प्रतीक मानी जाती है। इस भजन में पारम्परिक श्लोकों के साथ मूल रचित हिन्दी और सरल संस्कृत प्रार्थनाएँ हैं। पूजा के समय, शुक्रवार की सुबह, एकादशी या दिवाली के दिनों में इसे सुनें।
📜 भजन के बोल
॥ मुखड़ा ॥
जय लक्ष्मी नारायण, जय जय मंगलकारी
श्रीहरि संग श्रीजी, जोड़ी जग से न्यारी
[ॐ नमो नारायणाय।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
शान्तं सुन्दररूपं त्वां,
वन्दे लक्ष्मीपते हरिम्।
कमलनेत्रं दयापूर्णं,
भजे भक्तजनप्रियम्॥
पीताम्बरधरं देवं,
शङ्खचक्रधरं प्रभुम्।
दीनानां सुखदातारं,
नमामि पुरुषोत्तमम्॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
कमलहस्ते हे मातः,
लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते।
मधुरं तव रूपं मातः,
कृपां कुरु सदा मयि॥
सुखं देहि शान्तिं देहि,
प्रेमभक्तिं च देहि मे।
सद्बुद्धिं शुभमतिं देहि,
महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
कमलासने महालक्ष्मि,
करुणामयि मातरि।
सौभाग्यं देहि मे नित्यं,
सुखं शान्तिं च सर्वदा॥
धनधान्यसमृद्धिं च,
देहि लोकहिते रते।
सद्बुद्धिं च शुभां वृत्तिं,
देहि मे कमलालये॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
गरुडारूढ गोविन्द,
दीनबन्धो जनार्दन।
दुःखितानां गतिस्त्वं हि,
पाहि मां मधुसूदन॥
आरोग्यं च सुखं देहि,
शान्तिं देहि गृहे गृहे।
सर्वेषां जीवनं देव,
मङ्गलं कुरु सर्वदा॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
मम गृहे सुखं देहि,
मम चित्ते शमं कुरु।
सर्वेषां जीवनं देव,
मङ्गलं कुरुतं सदा॥
सर्वे भवन्तु सुखिनः,
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वेषां हृदये नित्यं,
भक्तिदीपः प्रकाशताम्॥
जय लक्ष्मी नारायण,
मङ्गलं कुरुतां लक्ष्मी नारायण।
जय लक्ष्मी नारायण,
कृपां कुरुतां लक्ष्मी नारायण॥
हे लक्ष्मीनारायण देवौ,
कृपां कुरुतं सर्वदा।
धनधान्यं सुखं देतं,
मङ्गलं कुरुतं गृहे॥
गृहे गृहे शुभं भूयात्,
धान्यपूर्णं गृहं भवेत्।
समृद्धिः सर्वदा भूयात्,
लक्ष्मीकृपा च सर्वदा॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे।
विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं
लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं
क्लीं लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नमः॥]
ℹ️ "शान्ताकारं भुजगशयनं", "मङ्गलं भगवान् विष्णुः", "नमस्तेऽस्तु महामाये", "त्वमेव माता च पिता त्वमेव", "कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा" और मन्त्र पारम्परिक पाठ हैं। मुखड़ा, हिन्दी अन्तरे और चार संस्कृत श्लोक मूल रचित हैं। पूजन-विधि परिवार और परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकती है।
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