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धनतेरस विशेष लक्ष्मी कुबेर स्तुति | धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि मंत्र | Dhanteras diwali bhajan 2026

Bhakti Dhuni Bhajan

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धनतेरस विशेष लक्ष्मी कुबेर स्तुति | धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि मंत्र | Dhanteras diwali bhajan 2026

9 400 просмотров · 21 ч назад
Bhakti Dhuni Bhajan
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धनतेरस भजन — धन्वन्तरि, लक्ष्मी और कुबेर की मंगल स्तुति: धनतेरस की शाम सुनने से मन को शांति और सुख-आरोग्य की प्रार्थना का भाव मिलता है। 🙏 शुभ धनतेरस 🙏 धनतेरस, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, दीपावली पर्व का पहला दिन है। इस दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए आयुर्वेद के देव भगवान धन्वन्तरि, धन की देवी माँ लक्ष्मी और धन के अधिपति श्री कुबेर का स्मरण किया जाता है। इस भजन में पारम्परिक श्लोकों के साथ मूल रचित हिन्दी और सरल संस्कृत प्रार्थनाएँ हैं। पूजन के समय, दीप जलाते हुए या धनतेरस की शाम इसे सुनें। 📜 भजन के बोल ॥ मुखड़ा ॥ जय धन्वन्तरि, जय लक्ष्मी माता जय कुबेर देव, सुख-धन के दाता धनतेरस के दीप जलाएँ आरोग्य और समृद्धि पाएँ [ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। ॐ यक्षराजाय कुबेराय नमः। ॐ मंगलं परमं दिव्यम्। ॐ सर्वकल्याणकारणम्॥ जय देवि कमलावासे, जय श्रीमङ्गलदायिनि। जय लक्ष्मि जगन्माते, पाहि मां परमेश्वरि॥ जय कुबेर धनाध्यक्ष, यक्षराज नमोऽस्तु ते। धनधान्यसमृद्धिं च, देहि मे करुणानिधे॥ जय जय लक्ष्मि महालक्ष्मि, जय जय श्रीमङ्गलप्रदे। जय जय कुबेर देव, सर्वसमृद्धिप्रदायक॥ जय जय लक्ष्मि महालक्ष्मि, जय जय पद्मनिवासिनि। जय जय कुबेर देव, भक्तपालनतत्पर॥ पद्मासने पद्मकरे, पद्मनेत्रे नमोऽस्तु ते। सुवर्णवर्णे शुभदेवि, सर्वमङ्गलदायिनि॥ क्षीरसागरसम्भूते, विष्णुवक्षःस्थलालये। करुणामृतवर्षिणि, पाहि मां जगदीश्वरि॥ धनं धान्यं च सौभाग्यं, सुखं शान्तिं च देहि मे। भक्तिं श्रद्धां च मे देवि, नित्यं हृदि निवासय॥ जय जय लक्ष्मि महालक्ष्मि, जय जय श्रीमङ्गलप्रदे। जय जय कुबेर देव, सर्वसमृद्धिप्रदायक॥ यक्षराज नमस्तुभ्यं, धनाध्यक्ष नमो नमः। अलकापुरीनाथ देव, कुबेराय नमो नमः॥ रत्नभाण्डारपालाय, लोकपालाय ते नमः। धर्ममार्गेण सम्प्राप्तं, ऐश्वर्यं देहि मे प्रभो॥ सत्कर्मेषु मतिं देहि, दानशीलं मनः कुरु। लोभमोहविनिर्मुक्तं, जीवनं मे सदा कुरु॥ लक्ष्मि कुबेर देवौ च, भक्तानुग्रहकारिणौ। उभौ देवौ नमस्यामि, मङ्गलं कुरुतं सदा॥ गृहे गृहे शुभं भूयात्, हृदये भक्तिरस्तु नः। अन्नपूर्णा भवेत् पृथ्वी, सर्वे सन्तु निरामयाः॥ दीपज्योतिः प्रकाशेन, नश्यन्तु दुःखराशयः। सर्वेषां जीवनं भूयात्, सुखशान्तिसमन्वितम्॥ जय जय लक्ष्मि महालक्ष्मि, जय जय श्रीमङ्गलप्रदे। जय जय कुबेर देव, सर्वसमृद्धिप्रदायक॥ जय जय पद्मवासिनि, जय जय धनदायक। जय जय करुणामयि, जय यक्षराज कुबेर॥ न मे लोभो न मे मानः, न मे केवलसम्पदः। भवतु भक्तिरव्यभिचारिणी, तव पादाम्बुजे सदा॥ त्वमेव माता लक्ष्मि, त्वमेव शरणं मम। कुबेर देव प्रसन्नो भूत्वा, मङ्गलं कुरु सर्वदा॥ दीपमालाविभूषिते, मङ्गले शुभवासरे। लक्ष्मीकुबेरपूजायां, नमामो भक्तिभावतः॥ सुवर्णरत्नसमृद्धेः, अधिकं धर्मसम्पदम्। सद्बुद्धिं सत्कृतिं चैव, देहि देवौ नमो नमः॥ जय जय लक्ष्मि महालक्ष्मि, जय जय श्रीमङ्गलप्रदे। जय जय कुबेर देव, सर्वसमृद्धिप्रदायक॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखमाप्नुयात्॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। ॐ कुबेराय नमो नमः। शुभं भवतु सर्वेषाम्। मङ्गलं भवतु सर्वदा॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥] ℹ️ "शङ्खं चक्रं जलौकां", "नमस्तेऽस्तु महामाये", "ॐ यक्षाय कुबेराय", "दीपज्योतिः परं ब्रह्म", "अच्युतानन्तगोविन्द", और सभी मन्त्र व शान्ति पाठ पारम्परिक पाठ हैं। मुखड़ा, हिन्दी अन्तरे और तीन संस्कृत श्लोक मूल रचित हैं। यह एक भक्ति-प्रस्तुति है। पूजन-विधि, मुहूर्त और परम्पराएँ परिवार, क्षेत्र और पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। 🔔 नए भजन सबसे पहले सुनने के लिए Bhakti Dhuni Bhajan को सब्सक्राइब करें। #धनतेरसभजन #Dhanteras2026 #धन्वन्तरिस्तुति #लक्ष्मीकुबेर #BhaktiDhuniBhajan