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कोदे कि रोटी, कंडाली कु साग, ❤️कुमाऊ गढ़वाल| #गढ़वाली #लोकगीत | #उत्तराखंड

Dhruv rana Official

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कोदे कि रोटी, कंडाली कु साग, ❤️कुमाऊ गढ़वाल| #गढ़वाली #लोकगीत | #उत्तराखंड

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Dhruv rana Official
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🎵 कोदे कि रोटी, कंडाली कु साग, बांजे जड़ीयूँ कु ठंडू पानी | गढ़वाली लोकगीत | उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू क्या आपको भी अपने गाँव की याद आती है? क्या आपको माँ के हाथ की रोटी, घी-गुड़ की रसयान, पहाड़ का ठंडा पानी, बुराँस के फूल, ढोल-दमाऊँ की थाप और गाँव के मेलों की याद सताती है? यह गीत केवल एक गाना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं, खान-पान, देवी-देवताओं, जागर, परिवार और पहाड़ की उस जीवनशैली को समर्पित है, जिसे लाखों उत्तराखंडी आज भी अपने दिल में बसाए हुए हैं। "कोदे कि रोटी, कंडाली कु साग, बांजे जड़ीयूँ कु ठंडू पानी" केवल भोजन का वर्णन नहीं है, बल्कि पहाड़ की सादगी, आत्मनिर्भरता और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का प्रतीक है। गीत में माँ के हाथ की रोटी, दादी-बाज्यू का प्यार, बुराँस की खुशबू, झोड़ा-चांचरी, चौफला, ढोल-दमाऊँ, जागर, देवी-देवता, घंडियाल देवता की जात, मठियाणा के मंदिर और पूरे परिवार के साथ बिताए गए सुनहरे पलों को याद किया गया है। यह गीत उन लाखों उत्तराखंडियों को समर्पित है जो आज दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, बेंगलुरु, गुजरात, पंजाब, हैदराबाद या विदेशों में रहते हैं, लेकिन जिनका दिल आज भी अपने गाँव, अपनी बोली, अपनी संस्कृति और अपनी मातृभूमि उत्तराखंड में बसता है। जब भी यह गीत सुनें, अपनी आँखें बंद करके अपने गाँव, अपने बचपन और अपने लोगों को याद कीजिए। ❤️ जय उत्तराखंड 🏔️ जय देवभूमि ━━━━━━━━━━━━━━━ 🎤 गायक : ध्रुव राणा एवं बलवंत राणा ✍️ गीतकार : बलवंत राणा 🎼 संगीत : Suno Pro AI Platform 🎬 निर्माता एवं संपादन : बलवंत राणा 📅 रिलीज़ डेट : 25 जून 2026 ━━━━━━━━━━━━━━━ अगर आप उत्तराखंड से प्रेम करते हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें। #GarhwaliLokgeet #UttarakhandCulture #PahadiSong #DhruvRana #BalwantRana #DevbhoomiUttarakhand #GarhwaliMusic #PahadiCulture