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गुरु वाक्यम् एपिसोड 1291 : पूर्व कर्मों के संस्कार मनुष्य की चेतना में स्थित होते हैं।

Shiv Yog

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गुरु वाक्यम् एपिसोड 1291 : पूर्व कर्मों के संस्कार मनुष्य की चेतना में स्थित होते हैं।

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शरीर के बाहरी आवरण में चार और परतें सूक्ष्म रुप से होती हैं। सबसे ऊपरी परत आनन्दमय कोष है, जो हर मनुष्य का मूल स्वरूप है अर्थात आनंद। उसके अंदर है ज्ञानयोग कोष, जिसमें उसके पूर्व जन्मों के संस्कार चिन्हित होते हैं। यही संस्कार उसके आज के सोच, विचार और कर्मों को प्रभावित करते हैं। जब तक यह संस्कार heal नहीं होते, तब तक यह उसके मनोमय कोष को और स्थूल शरीर को प्रभावित करते रहते हैं। जीवन परिवर्तन करने वाली ध्यान साधनाओं को सीखने के लिए हमारे साप्ताहिक शिवयोग फोरम के कार्यक्रमों से जुड़े l For learning the life-transforming meditations of Shiv Yog, join our weekly forums #worldwide - www.shivyogforum.com #Connect with Us on www.shivyog.com #ShivYog Forum - www.shivyogforum.com #ShivYog Portal - www.shivyogportal.com #ShivYog Videos - www.shivyogtv.com #ShivYog Krishi - www.shivyogkrishi.com #ShivYog Cure Is Possible - www.cureispossible.org