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Chapter 8 aldehyde ketone and carboxylic acid full explanation, based on ncert

Chemistry by Laxmi mam

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Chapter 8 aldehyde ketone and carboxylic acid full explanation, based on ncert

81 просмотр · 5 дней назад
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ऐल्डिहाइड, कीटोन और कार्बोक्सिलिक एसिड कार्बनिक रसायन विज्ञान के तीन बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ग हैं। ये तीनों ही यौगिक कार्बोनिल समूह (एक कार्बन atom जो ऑक्सीजन atom के साथ डबल बॉन्ड से जुड़ा होता है) की उपस्थिति के कारण आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। कार्बोनिल समूह की मौजूदगी के कारण इन तीनों की संरचना, रासायनिक गुण और उपयोगिता काफी खास होती है। ​1. ऐल्डिहाइड (Aldehyde) ​ऐल्डिहाइड वे कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बोनिल समूह श्रृंखला के अंत में स्थित होता है। ​संरचना: इसमें कार्बोनिल कार्बन कम से कम एक हाइड्रोजन परमाणु से जुड़ा होता है। इसका सामान्य सूत्र R-CHO होता है (जहाँ R कोई एल्किल या एरिल समूह हो सकता है, अथवा हाइड्रोजन भी हो सकता है)। ​नामकरण: आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण पद्धति में ऐल्डिहाइड के नाम के अंत में -अल (-al) अनुलग्न (suffix) जोड़ा जाता है। जैसे: फॉर्मेल्डिहाइड को मेथेनल और एसेटेल्डिहाइड को एथेनल कहा जाता है। ​रासायनिक गुण: ऐल्डिहाइड में हाइड्रोजन परमाणु सीधे कार्बोनिल कार्बन से जुड़ा होता है, इसलिए इसका आसानी से ऑक्सीकरण (Oxidation) हो जाता है और यह कार्बोक्सिलिक एसिड में बदल जाता है। यह टॉलेन अभिकर्मक (Tollen's Reagent) और फेलिंग विलयन (Fehling's Solution) को अपचित कर देता है। ​उपयोग: फॉर्मेल्डिहाइड का उपयोग जैविक नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए फॉर्मेलिन के रूप में किया जाता है। इसके अलावा इत्र, प्लास्टिक, और रंजकों (Dyes) के निर्माण में भी ऐल्डिहाइड का व्यापक रूप से उपयोग होता है। ​2. कीटोन (Ketone) ​कीटोन में कार्बोनिल समूह श्रृंखला के बीच में स्थित होता है, यानी यह कार्बन दो अन्य कार्बन परमाणुओं से घिरा होता है। ​संरचना: इसमें कार्बोनिल कार्बन दो एल्किल या एरिल समूहों से जुड़ा होता है। इसका सामान्य सूत्र R-CO-R' होता है। इसमें कार्बोनिल कार्बन से कोई भी हाइड्रोजन परमाणु सीधे नहीं जुड़ा होता। ​नामकरण: IUPAC पद्धति के अनुसार, कीटोन के नाम के अंत में -ओन (-one) अनुलग्न जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, सबसे सरल कीटोन एसेटोन है, जिसे प्रोपेनोन कहा जाता है। ​रासायनिक गुण: कीटोन में सीधे जुड़ा हाइड्रोजन परमाणु न होने के कारण इसका ऑक्सीकरण ऐल्डिहाइड की तुलना में कठिन होता है। यह टॉलेन या फेलिंग परीक्षण जैसे सामान्य ऑक्सीकरण परीक्षण नहीं देता। हालांकि, यह नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाएं (Nucleophilic Addition Reactions) आसानी से प्रदर्शित करता है। ​उपयोग: कीटोन बेहतरीन विलायक (Solvents) माने जाते हैं। एसेटोन का उपयोग नेल पॉलिश रिमूवर, पेंट थिनर और विभिन्न औद्योगिक विलायकों के रूप में बहुत बड़े पैमाने पर होता है। ​3. कार्बोक्सिलिक एसिड (Carboxylic Acid) ​कार्बोक्सिलिक एसिड में कार्बोनिल समूह सीधे एक हाइड्रॉक्सिल समूह (OH) से जुड़ा होता है। इस संयुक्त समूह को कार्बोक्सिल समूह (COOH) कहा जाता है। ​संरचना: इसका सामान्य सूत्र R-COOH होता है। हाइड्रॉक्सिल समूह की उपस्थिति के कारण यह ऐल्डिहाइड और कीटोन की तुलना में अधिक अम्लीय गुण प्रदर्शित करता है। ​नामकरण: IUPAC नामकरण में इसके नाम के अंत में -ओइक एसिड (-oic acid) जोड़ा जाता है। जैसे: फॉर्मिक एसिड को मेथेनोइक एसिड और एसिटिक एसिड को एथेनोइक एसिड कहा जाता है। ​रासायनिक गुण: यह जल में आंशिक रूप से आयनित होकर हाइड्रोजन आयन मुक्त करता है, जिससे यह अम्लीय प्रकृति दर्शाता है। यह क्षारों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाता है। इसके अलावा, जब कार्बोक्सिलिक एसिड अल्कोहल के साथ अभिक्रिया करता है, तो मीठी गंध वाले एस्टर (Ester) बनते हैं। ​उपयोग: एसिटिक एसिड का उपयोग सिरके (Vinegar) के रूप में भोजन में किया जाता है। बेंजोइक एसिड का उपयोग खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने (Preservative) के लिए किया जाता है। इसके अलावा साबुन, डिटर्जेंट और दवाइयों के निर्माण में वसीय अम्लों (Fatty Acids) का बड़ा योगदान है। ​मुख्य अंतर ​कार्बोनिल समूह की स्थिति: ऐल्डिहाइड में यह कार्बन श्रृंखला के अंत में, कीटोन में श्रृंखला के बीच में, और कार्बोक्सिलिक एसिड में OH समूह के ठीक बगल में होता है। ​ऑक्सीकरण: ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण सबसे आसान होता है, जबकि कीटोन का ऑक्सीकरण काफी कठिन होता है। ​अम्लीयता: ऐल्डिहाइड और कीटोन उदासीन या बहुत ही क्षीण व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, जबकि कार्बोक्सिलिक एसिड स्पष्ट रूप से अम्लीय गुण दर्शाते हैं।