घट फूटा तो नभ न टूटा |अद्वैत भजन -2 | अवधूत गीता | दत्तात्रेय की अवधूत-वाणी
सीधी चोट
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घट फूटा तो नभ न टूटा |अद्वैत भजन -2 | अवधूत गीता | दत्तात्रेय की अवधूत-वाणी
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🔱 घट फूटा तो नभ न टूटा | अवधूत गीता का अद्वैत भजन
“घट फूटा तो नभ न टूटा, कैसा बंधन कैसी मुक्ति?”
एक छोटा-सा मिट्टी का घट अपने भीतर आकाश को सीमित करता हुआ दिखाई देता है। लेकिन जब घट टूट जाता है, तो क्या आकाश भी टूटता है?
नहीं।
घट केवल सीमा का भ्रम था — आकाश तो पहले भी अखंड था।
इसी गहरे अद्वैत सत्य को संगीत और निर्गुण भक्ति के माध्यम से प्रस्तुत करता है यह अवधूत गीता से प्रेरित दूसरा भजन।
दत्तात्रेय की अवधूत-वाणी हमें उस पहचान के पार ले जाती है जिसे हम देह, जाति, नाम, रूप, पाप-पुण्य, सुख-दुःख और कर्म के रूप में पकड़कर बैठे हैं।
तू देह नहीं, तू नित्य चेतना है।
तू कभी बंधा ही नहीं था।
इसलिए मुक्ति भी कोई नई उपलब्धि नहीं —
अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना ही मुक्ति है।
“घट फूटा तो नभ न टूटा,
कैसा बंधन कैसी मुक्ति?
गगन से गगन मिला जब,
व्यर्थ हुई ये सारी युक्ति।”
यह भजन पूछता है—
जब तू अखंड आत्मा है, तो डरता किससे है?
जब सत्य तेरे भीतर है, तो उसे बाहर क्यों खोजता है?
जब तू साक्षी है, तो मन की उलझनों को अपना क्यों मानता है?
जाति-वर्ण की सीमाओं से परे,
नाम-रूप के पर्दे से परे,
पाप-पुण्य के द्वंद्व से परे,
कर्ता-भोक्ता के भ्रम से परे—
तू वही नित्य, निरंजन, अखंड चेतना है।
🕉️ भजन का मूल संदेश
घट टूटता है — आकाश नहीं।
देह बदलती है — चेतना नहीं।
मन बदलता है — साक्षी नहीं।
नाम मिटता है — आत्मस्वरूप नहीं।
इसलिए अंतिम पुकार है—
“घट टूटा, व्योम अचल रहा!
तू कभी बंधा ही नहीं था,
तू मुक्त ही है!”
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📖 अवधूत गीता से प्रेरित
यह रचना अवधूत गीता के अद्वैत दर्शन और दत्तात्रेय की अवधूत परंपरा से प्रेरित एक रचनात्मक संगीत प्रस्तुति है।
इसमें निर्गुण चेतना, अद्वैत, आत्मबोध, साक्षीभाव और बंधन-मुक्ति के वास्तविक अर्थ को लोक-सूफी और निर्गुण संगीत की शैली में व्यक्त किया गया है।
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🎵 श्रृंखला: अवधूत गीता से प्रेरित भजन
🔱 भाग: 02
🕉️ विषय: अद्वैत • आत्मबोध • साक्षीभाव • निर्गुण चेतना • मुक्ति
अगर यह भजन आपके भीतर भी यह प्रश्न जगाता है कि “मैं वास्तव में कौन हूँ?”, तो इसे सुनें, मनन करें और किसी ऐसे व्यक्ति तक अवश्य पहुँचाएँ जो आत्मबोध की यात्रा पर है।
🙏 हरि ॐ तत्सत्।
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🎵 प्रस्तुत भजन
✍️ शब्द: आचार्य प्रशांत जी की पुस्तकों , व AI से प्रेरित (Gemini व चैट gpt )
🎼 धुन: सिधिचोट (स्वयं तैयार करता है)
🎤 स्वर: Suno AI से
🙏 यह एक आध्यात्मिक प्रयास है, जिसमें तकनीक के माध्यम से भक्ति भाव प्रस्तुत किया गया है व संतो के शब्दों को घर घर पहचानें की एक कोशिश है .