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पैसिफ़िक के ख़ज़ाने: समुद्र के साथ ज़िंदगी [Treasure islands in the pacific] | DW Documentary हिन्दी

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पैसिफ़िक के ख़ज़ाने: समुद्र के साथ ज़िंदगी [Treasure islands in the pacific] | DW Documentary हिन्दी

164 004 просмотра · 1 год назад
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हम एक सुदूर और आकर्षक दुनिया के रोमांचक सफ़र पर निकले हैं. बहुत दूर तक फैले प्रशांत महासागर में, जहां लोग छिपे हुए ख़ज़ाने ढूंढते हैं. यहां कई एटोल ग़ायब होने के क़रीब हैं. वहीं एक बहुत बड़ी जगह में परमाणु कचरा रखा है, जिसके फट जाने का ख़तरा है. दो भागों वाली इस डॉक्यूमेंट्री के लिए एक कैमरा टीम ने प्रोपेलर वाले जहाज़ में सफ़र किया और प्रशांत महासागर के ‘ख़ज़ानों वाले द्वीपों’ तक गई. टीम ने जिस इलाक़े का चक्कर लगाया, वह चीन और अमेरिका के संयुक्त क्षेत्रफल के बराबर है. लेकिन यहां की आबादी बर्लिन से भी आधी है. चैटम द्वीपों पर हमने यह जाना कि जब चारों तरफ़ सिर्फ़ पानी ही पानी हो, तो अकेलापन रोज़ की चुनौती बन जाता है. यहां एक सप्लाई शिप वक़्त पर नहीं पहुंचा, जिसकी वजह से खाने-पीने की चीज़ें बहुत जल्दी महंगी हो गईं और डीज़ल की भी क़िल्लत हो गई. लेकिन इस अलग-थलग जगह एक ख़ज़ाना भी मिलता है. ऐसी चीज़, जो खाने के शौक़ीन लोग बहुत पसंद करते हैं और जो बहुत ऊंचे दामों पर बिकती है: एबालोनी. यह क़ीमती समुद्री घोंघा है. जेड काहुकोरे डिक्सन समुद्र में 10 से 15 मीटर गहराई में डुबकी लगाकर इन्हें इकठ्ठा करते हैं. वह बताते हैं कि अगर दिन अच्छा हो, तो वह दो-ढाई हज़ार न्यू ज़ीलैंड डॉलर तक कमा सकते हैं. मगर यह काम बहुत ख़तरनाक भी है, क्योंकि यह ग्रेट वाइट शार्क का इलाक़ा है. ग़ोताख़ोर अक्सर ज़ख़्मी हो जाते हैं या कभी-कभी जान भी गंवा देते हैं. कुछ लोगों के लिए जो ख़ज़ाना है, दूसरे उसे बोझ समझते हैं. मार्शल द्वीपों पर हमें वह इलाक़ा मिला, जहां अमेरिका ने 1960 के दशक तक एटॉमिक और हाइड्रोजन बम के परीक्षण किए थे. इन दूर-दराज़ के एटोल्स में रहने वाले लोग आज भी उन धमाकों के असर के साथ ज़िंदगी बसर कर रहे हैं. रुनित द्वीप पर दुनिया में परमाणु कचरे की सबसे बड़ी साइट्स में से एक मौजूद है. इसकी ढांचागत मज़बूती अब समुद्र की बढ़ती सतह और समुद्री तूफ़ानों की वजह से ख़तरे में है. तुवालू में टीम ने पाया कि हर बुरी भविष्यवाणी जांच करने पर सही साबित नहीं होती. यह फ़िल्म जेड काहुकोरे डिक्सन को समर्पित की गई है. वह 24 साल के ग़ोताख़ोर थे और चैटम आइलैंड्स में रहते थे. टीम ने उनके काम को उनके साथ रहकर देखा. फ़िल्म ख़त्म होने के दो महीने बाद जेड काहुकोरे डिक्सन की ग्रेट वाइट शार्क के हमले में मौत हो गई. #dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #pacific #chatham #marshallislands ---------------------------------------------------------------------------------------- अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए. विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: ‪@dwhindi‬ और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G