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शरीर और मन मिथ्या है तो किसी की सेवा क्यों करें?/रविन्द्र यादव

Sangam Vichardhara संगम विचारधारा

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शरीर और मन मिथ्या है तो किसी की सेवा क्यों करें?/रविन्द्र यादव

7 просмотров · 4 ч назад
Sangam Vichardhara संगम विचारधारा
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7 просмотров · 4 ч назад
नमस्कार 🙏 🙏 🙏 🙏 क्या आपने कभी सोचा है — अगर शरीर और मन मिथ्या है, अगर यह संसार मिथ्या है, तो फिर किसी की मदद या सेवा क्यों करें? क्या अध्यात्म का अर्थ संसार से भाग जाना है? क्या सेवा भी एक भ्रम है? इस वीडियो में अष्टावक्र गीता के गहरे रहस्य को खोला गया है — मिथ्या का असली अर्थ क्या है, सेवा किसकी करनी है, और कैसे सेवा और मुक्ति एक ही हैं। जानिए कि कैसे सच्ची सेवा में "मैं" नहीं होता, और कैसे जब "मैं" नहीं होता — तब सेवा स्वयं हो जाती है। हनुमान का दास भाव, विभीषण का त्याग, जटायु का समर्पण, नचिकेता का प्रश्न — इन सबसे जुड़कर यह वीडियो आपको सेवा के मूल तक ले जाएगा। और वहाँ आप पाएंगे — वह शांति जो सदा आपके भीतर थी। यह वीडियो उनके लिए है जो अध्यात्म और जीवन के बीच के अंतर को समझना चाहते हैं, जो सेवा करना चाहते हैं पर यह नहीं जानते कि सच्ची सेवा क्या है। वीडियो पूरा देखें। और अगर यह समझ आपके भीतर कुछ जगाए — तो कमेंट में बताइए। #सेवाऔरमुक्ति #मिथ्याक्याहै #अष्टावक्रगीता #साक्षीभाव #आत्मबोध