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रोहगुप्त का त्रैराशिक सिद्धांत एवं गोष्ठामाहिल का अव्यक्तवाद | गुरु कृपा वाणी Ep. 37

Guru Krupa Vaani | गुरु कृपा वाणी

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रोहगुप्त का त्रैराशिक सिद्धांत एवं गोष्ठामाहिल का अव्यक्तवाद | गुरु कृपा वाणी Ep. 37

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Guru Krupa Vaani | गुरु कृपा वाणी
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🙏 जय जिनेन्द्र! 🙏 गुरु कृपा वाणी के सैंतीसवें एपिसोड में आपका हार्दिक स्वागत है। इस एपिसोड में हम भगवान महावीर के सिद्धांतों से विपरीत मत स्थापित करने वाले दो निह्नवों — रोहगुप्त और गोष्ठामाहिल — के प्रसंगों को समझेंगे। 🔸 प्रथम प्रसंग — रोहगुप्त का त्रैराशिक सिद्धांत रोहगुप्त ने जीव और अजीव के अतिरिक्त नोजीव को तीसरी स्वतंत्र राशि के रूप में स्वीकार किया। इस प्रसंग में हम उनके त्रैराशिक सिद्धांत, शास्त्रार्थ की घटना और छिपकली की कटी हुई पूँछ के उदाहरण के माध्यम से समझेंगे कि किसी वस्तु में बाहरी गतिविधि दिखाई देने मात्र से उसकी स्वतंत्र तात्त्विक सत्ता सिद्ध नहीं होती। 🔸 द्वितीय प्रसंग — गोष्ठामाहिल का अव्यक्तवाद इस प्रसंग में जीव, कर्म, कर्मबंध और प्रत्याख्यान जैसे विषयों पर विचार करेंगे। साथ ही समझेंगे कि शास्त्रीय सिद्धांतों की व्याख्या करते समय उनके मूल अर्थ, संदर्भ और तर्क को समझना क्यों आवश्यक है। ✨ इस एपिसोड से मिलने वाली सीख • किसी भी सिद्धांत को स्वीकार करने से पहले उसके अर्थ और प्रमाण को समझें। • केवल बाहरी लक्षणों के आधार पर किसी वस्तु का वास्तविक स्वरूप निर्धारित न करें। • शास्त्र का अध्ययन करते समय तर्क, विवेक और विनम्रता बनाए रखें। • अपने मत पर हठ करने के बजाय सत्य को समझने का प्रयास करें। जैन दर्शन हमें सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् चरित्र की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यदि आपको यह एपिसोड उपयोगी लगे, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग जैन दर्शन के इन महत्त्वपूर्ण प्रसंगों को समझ सकें। 🙏 नमो अरिहंताणं। 🙏 नमो सिद्धाणं। 🙏 नमो आयरियाणं। 🙏 नमो उवज्झायाणं। 🙏 नमो लोए सव्वसाहूणं। जय जिनेन्द्र! #GuruKripaVaani #Jainism #JainDharma #JainPhilosophy #जैनधर्म #जैनदर्शन #रोहगुप्त #गोष्ठामाहिल #निह्नव #JainPodcast