आत्मा का बेहद का ज्ञान | आत्मा बिंदु, ज्योति और स्टार मिसल का वास्तविक अर्थ | शंख नाद 1
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आत्मा का बेहद का ज्ञान | आत्मा बिंदु, ज्योति और स्टार मिसल का वास्तविक अर्थ | शंख नाद 1
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:ॐ शांति 🙏
ज्ञान मानसरोवर परिवार – नवी मुंबई प्रस्तुत करता है:
आत्मा का बेहद का ज्ञान | शंख नाद 1
भगवान उवाच — हे पार्थ! आत्मा को जानना अर्थात स्वयं को जानना।
आत्मा को केवल जानना और आत्मिक स्वरूप में स्थित होना — इन दोनों में क्या अंतर है? आत्मा को आत्म-अभिमानी स्थिति में स्थित होने के लिए देह, देहधारियों और पाँच तत्वों से बने इस भौतिक संसार के चिंतन से ऊपर उठना क्यों आवश्यक है?
इस क्लास में हम आत्मा और परमात्मा के विषय में कही जाने वाली “बिंदु रूप”, “ज्योति स्वरूप” और “स्टार मिसल” जैसी गूढ़ बातों को बेहद के दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करेंगे।
🔹 आत्मा को बिंदु रूप क्यों कहा जाता है?
🔹 आत्मा और चार युगों के सृष्टिचक्र का क्या संबंध है?
🔹 आत्मा को स्टार मिसल कहने का वास्तविक अर्थ क्या है?
🔹 आत्मा को ज्योति स्वरूप क्यों कहा जाता है?
🔹 क्या आत्मा वास्तव में कोई भौतिक बिंदु, तारा या ज्योति है?
🔹 आत्मा पाँच तत्वों से परे है तो “ज्योति” शब्द का बेहद का अर्थ क्या है?
🔹 ज्ञान सूर्य, ज्ञान चंद्रमा और ज्ञान सितारे — इनका गुह्य अर्थ क्या है?
🔹 ज्ञान की दिव्य दृष्टि और तीसरे नेत्र की आवश्यकता क्यों है?
🔹 हद के साधनों और जड़ प्रतीकों से निकलकर बेहद के ज्ञान में जाना क्या है?
🔹 आत्मा और परमात्मा को यथार्थ रीति जानने के लिए सूक्ष्म और विशाल बुद्धि क्यों आवश्यक है?
ज्ञान सागर के किनारे खड़े रहने से केवल रेत मिलती है; ज्ञान सागर की गहराई में उतरने से ही ज्ञान के मोती प्राप्त होते हैं।
इसलिए आइए, केवल आत्मा का ज्ञान सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान की गहराई में जाकर आत्मिक स्वरूप को अनुभव करने और आत्म-अभिमानी स्थिति में स्थित होने का अभ्यास करें।
इस क्लास का अगला चरण — “आत्मा का सूक्ष्म एवं बेहद ज्ञान” — शंख नाद 2 में और गहराई से समझने का प्रयास करेंगे।
🙏 आपका स्वागत है ज्ञान मानसरोवर परिवार – नवी मुंबई में।
ॐ शांति।
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