पैसे की इतनी कमी क्यों है? ("जेब हमेशा खाली रहती है") || आचार्य प्रशांत (2026)
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
0:00 / 0:00
पैसे की इतनी कमी क्यों है? ("जेब हमेशा खाली रहती है") || आचार्य प्रशांत (2026)
726 264 просмотра · 3 недели назад
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
60,9 млн подписчиков
726 264 просмотра · 3 недели назад
🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquir...
📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?...
📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें:
Android: https://play.google.com/store/apps/de...
iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya...
📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articl...
➖➖➖➖➖➖
#आचार्यप्रशांत #AcharyaPrashant #bhagavadgita #money #success #investment #marriage #education #genz
वीडियो जानकारी: 01.08.2026, बोध प्रत्यूषा सत्र, ग्रेटर नोएडा
Title: जीवन में पैसे की इतनी कमी क्यों है? ("मैं कमाता हूँ, फिर भी जेब हमेशा खाली रहती है")||आचार्य प्रशांत
विवरण:- पैसा कमाने के बावजूद अगर महीने के अंत में फिर वही खालीपन महसूस हो, तो क्या समस्या सिर्फ कम कमाई की है? या हम अपनी कमाई को ऐसी जगह खर्च कर रहे हैं जहाँ से जीवन में वास्तविक समृद्धि आती ही नहीं?
इस वीडियो में, आचार्य प्रशांत पैसे, अभाव की मानसिकता और हमारी आर्थिक प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात करते हैं। चर्चा इस बात से शुरू होती है कि वास्तविक गरीबी और दूसरों से तुलना के कारण पैदा हुई ‘गरीबी की भावना’ में क्या अंतर है। इसके बाद घर की ईएमआई, दहेज, शादियों में दिखावा, सोना, मनोरंजन, सामाजिक प्रतिष्ठा और अनावश्यक उपभोग जैसे खर्चों पर सवाल उठते हैं। साथ ही यह भी समझाया जाता है कि एक सीमा के बाद अधिक पैसा जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के बजाय उल्टा बोझ बन सकता है।
बात आगे बढ़कर इस सवाल तक पहुँचती है कि पैसा आखिर किस काम का होना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, बेहतर संगति, ऊँचे स्तर के सुख और बेहतर समाज के निर्माण में पैसा लगाना कैसा खर्च है? महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, परिवार की आर्थिक संरचना और सामाजिक परंपराओं के नाम पर होने वाले खर्चों पर भी चर्चा होती है। क्या हमारी आर्थिक समस्या सचमुच पैसे की है, या यह तय करने की है कि पैसा कहाँ लगाया जाए और किस चीज़ को प्राथमिकता दी जाए?
मुख्य बिंदु:
वास्तविक गरीबी और दूसरों से तुलना वाली गरीबी में अंतर
पैसे का सही उपयोग: मात्रा नहीं, जीवन की गुणवत्ता
शादी, दहेज और सामाजिक दिखावे पर होने वाला फिजूल खर्च
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
https://open.spotify.com/show/3f0KFwe...
~~
~~~