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जहाजों ने भी इस पर कब्जा करने के लिए समंदर का सीना चीर दिया था।#murudjanjira #oceanmonster #mystery

PracheenGyan

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जहाजों ने भी इस पर कब्जा करने के लिए समंदर का सीना चीर दिया था।#murudjanjira #oceanmonster #mystery

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PracheenGyan
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जहाजों ने भी इस पर कब्जा करने के लिए समंदर का सीना चीर दिया था।#murudjanjira #oceanmonster #mystery #unconquered #seafort #indian #murudjanjirafort #marathahistory #siddiq #dynastywarriors #Impenetrable #Fort #indianforts #navalwarfare #maritimehistory #untoldstory #indianhistory #SeaFortress #historyofmaharashtra #konkandiaries #hindidocumentary #youtubedocumentary #historicalmysteries #ancientarchitecture पुर्तगालियों की विशाल नौसेना आई, डच लुटेरों के जहाज आए और खुद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी सबसे आधुनिक तोपों से इस किले पर लाखों गोले बरसाए। लेकिन जंजीरा की दीवारों को खरोंच तक नहीं आई। जो भी जहाज इस किले के करीब जाने की कोशिश करता, वह समंदर की गहराइयों में दफन हो जाता। 200 सालों तक यह किला पूरी दुनिया के लिए एक अनसुलझा रहस्य बना रहा। यहाँ तक कि महान छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस किले की रणनीतिक ताकत को समझा था और इसे जीतने के लिए अपनी पूरी नौसेना झोंक दी थी। आखिर इस किले की वास्तुकला (Architecture) में ऐसा कौन सा गुप्त राज छिपा था, जिसने इसे इतिहास का इकलौता 'अजेय जल-दुर्ग' बना दिया? चलिए जानते हैं आज की इस वीडियो में। लेकिन इस किले का सबसे बड़ा और दिमागी जादुई राज था इसका मुख्य दरवाजा (The Invisible Entrance)। अगर आप समंदर में एक किलोमीटर दूर खड़े होकर दूरबीन से भी इस किले को देखेंगे, तो आपको इसका मुख्य दरवाजा कभी दिखाई नहीं देगा। इसे इस तरह 'जिग-जैग' (घुमावदार) वास्तुकला से बनाया गया था कि जब तक दुश्मन का जहाज किले के बिल्कुल मुंह पर (मुश्किल से 20-30 मीटर पास) न आ जाए, तब तक दरवाजा दिखता ही नहीं था। और जैसे ही दुश्मन का जहाज उस दरवाजे को ढूंढने के लिए पास आता, किले की बुर्जों में छिपी तोपें उस जहाज को बीच से फाड़कर समंदर के भीतर डुबो देती थीं। अंग्रेजों और पुर्तगालियों ने कई बार जंजीरा की महीनों तक घेराबंदी की। उन्हें लगा कि समंदर के बीच बने इस किले में पीने का पानी खत्म हो जाएगा और सिद्दी घुटने टेक देंगे। लेकिन कुदरत का करिश्मा देखिए—चारों तरफ मील दूर तक फैले खारे और जहरीले समंदर के बीचों-बीच, इस किले के पेट में 60 फीट गहरे मीठे और शुद्ध पानी के दो तालाब थे। किले के भीतर अनाज के विशाल गोदाम थे। यानी अगर दुश्मन इस किले को दो साल तक भी घेर कर रखता, तो भी किले के भीतर रहने वाले 5,000 लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता था। वे अंदर आराम से मीठा पानी पीते और ताजी मछलियां पकड़कर दावत उड़ाते थे। जंजीरा को जीतने का सबसे भयानक और साहसी प्रयास किया था छत्रपति शिवाजी महाराज के सुपुत्र—छत्रपति शंभाजी महाराज ने। जब उन्होंने देखा कि जहाजों से इस किले को जीतना नामुमकिन है, तो उन्होंने प्रकृति के नियमों को ही चुनौती दे दी। उन्होंने समंदर के बीचो-बीच पत्थरों का एक ऐसा मैन-मेड ब्रिज बनाना शुरू किया, जो किनारे से सीधे जंजीरा किले की दीवार तक जाता था। यह काम नामुमकिन था, क्योंकि समंदर की लहरें हर रात पत्थरों को बहा ले जाती थीं, लेकिन मराठा वीरों के हौसले के आगे समंदर भी हार मानने लगा था। पुल का एक बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका था। मराठों की सेना किले की दीवारों के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी थी। सिद्दी लड़ाकों के होश उड़ चुके थे क्योंकि उन्होंने इतिहास में पहली बार किसी को समंदर पर पैदल चलकर आते देखा था। आज भी जब आप अरब सागर की लहरों के बीच इस किले को देखेंगे, तो आपको भारत के उस प्राचीन धातु विज्ञान, इंजीनियरिंग और रणनीतिक सोच पर गर्व होगा। जंजीरा सिर्फ एक किला नहीं है, यह इस बात का सबूत है कि जब इंसानी दिमाग कुदरत के भूगोल को अपनी बुद्धिमत्ता से जोड़ देता है, तो वह एक ऐसा अजूबा खड़ा कर सकता है जिसे सदियों तक दुनिया की कोई भी ताकत मिटा नहीं सकती।