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गुरु-भाई का विश्वासघात: लो फ़ंग की ‘किरिन भुजा’ वापस पाने की जंग

नज़र रंगमंच

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गुरु-भाई का विश्वासघात: लो फ़ंग की ‘किरिन भुजा’ वापस पाने की जंग

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नज़र रंगमंच
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ऊर्ध्वलोक का तलवार-सुप्रीम ये यांग अपने ही गुरु-भाई, ‘किरिन सुप्रीम’ लो फ़ंग, को फँसाकर उसकी साधना छीन लेता है। बिखरी हुई आत्मा निचले साधना-लोक में भागकर एक साधारण शियाओयाओ संप्रदाय के सेवक-शिष्य के शरीर में जागती है—वही नाम, नया आरंभ। शून्य से फिर उठने की ठानकर लो फ़ंग खोई हुई ‘किरिन भुजा’ खोजने और बदला लेने की राह पकड़ता है। संप्रदाय के भीतर तिरस्कार और बाहर ताकतवर शत्रु, हर कदम पर चुनौती बनते हैं। इसी बीच उसे पता चलता है कि उसकी मंगेतर जियांग मैन प्राचीन साधना-वंश जियांग कुल की बिछुड़ी संतान है। दोनों साथ खड़े होते हैं, पर जियांग कुल और तीन महा-संप्रदायों की दबिश उन पर एक साथ टूट पड़ती है। एक सुप्रीम की स्मृतियों और देह-तप की दुर्लभ देह के सहारे, लो फ़ंग धीरे-धीरे शक्ति लौटाता है, शियाओयाओ संप्रदाय को अपने साथ जोड़ता है। मगर हर उन्नति के साथ दांव और ऊंचे होते जाते हैं—‘किरिन भुजा’ का असली रहस्य किस ओर इशारा करता है? क्या वह निचले लोक को एकजुट कर ऊर्ध्वलोक की दहलीज़ तक फिर पहुँच पाएगा? निष्ठा और विश्वासघात के बीच, उसके निर्णय ही उसकी किस्मत लिखेंगे।