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सुभाषितों के आईने में हमारा समय- रचनाकारों से प्रो. संजीव भानावत का विशेष संवाद I Sanjeev Bhanawat

sanjeev bhanawat

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सुभाषितों के आईने में हमारा समय- रचनाकारों से प्रो. संजीव भानावत का विशेष संवाद I Sanjeev Bhanawat

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#sanjeevbhanawat #communicationtoday भारतीय ज्ञान-परंपरा में सुभाषित केवल सुंदर कथन नहीं, बल्कि अनुभव, विवेक और जीवन-मूल्यों के संक्षिप्त सूत्र हैं। डॉ. मुरलीधर पालीवाल और डॉ. सुरेंद्र कटारिया द्वारा रचित ‘नवसुभाषितम्’ इन्हीं प्राचीन सूत्रों को 21वीं सदी के भारतीय समाज और उसकी बदलती चुनौतियों से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। “सुभाषितों के आईने में हमारा समय” शीर्षक से इस विशेष संवाद में प्रो. संजीव भानावत दोनों रचनाकारों से पुस्तक की परिकल्पना, सृजन-यात्रा और संयुक्त लेखन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हैं। बातचीत में अध्यात्म, ज्ञान, विवेक, चरित्र-निर्माण, जीवन-प्रबंधन, सामाजिक संबंध, शिक्षा, बाजारवाद, तकनीक, सोशल मीडिया, लोकतंत्र, नेतृत्व और राष्ट्रबोध जैसे महत्त्वपूर्ण विषय सामने आते हैं। संस्कृत सुभाषितों के साथ सरल हिन्दी भावार्थ, समकालीन व्याख्या और लेखकों द्वारा रचित दोहों का संयोजन इस पुस्तक को विशिष्ट बनाता है। संवाद यह प्रश्न भी उठाता है कि सूचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में क्या प्राचीन जीवन-दृष्टि आधुनिक मनुष्य को नैतिक दिशा दे सकती है। संवाद विद्यार्थियों, शिक्षकों और भारतीय ज्ञान-परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। इस विचारोत्तेजक संवाद को अवश्य देखें। वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, अपनी प्रतिक्रिया लिखें, साझा करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। #navsubhashitam #subhashit #indianwisdom #sanskritliterature #hindiliterature #bookinterview #sanjeevbhanawat #communicationtoday #lifelessons #socialvalues #surendrakataria #murlidharpaliwal