Webinar #233 Beyond the Battlefield: Media Manipulation, AI Disinformation and the Battle for Public
sanjeev bhanawat
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Webinar #233 Beyond the Battlefield: Media Manipulation, AI Disinformation and the Battle for Public
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कम्युनिकेशन टुडे, जयपुर और बीवीआईसीएएम, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 7 सितंबर 2026 को 233वां राष्ट्रीय वेबिनार “युद्धभूमि से परे: मीडिया मैनिपुलेशन, एआई दुष्प्रचार और जनमत की लड़ाई” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सामरिक अध्ययन के विद्यार्थी नमन अटोलिया और सुमित दहीफले विषय विशेषज्ञ रहे। बीवीआईसीएएम के सहायक प्रोफेसर जयंत सिंह ने दोनों वक्ताओं का स्वागत किया।
विषय प्रवर्तन करते हुए कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि 2026 का ईरान–इज़राइल–अमेरिका संघर्ष मिसाइलों, ड्रोन और आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। इसके समानांतर मोबाइल स्क्रीन, टेलीविजन, समाचार वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर जनमत को नियंत्रित करने का युद्ध भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि सूचना रणनीतिक हथियार बन चुकी है तथा खबरों की शब्दावली, तस्वीरों और विशेषज्ञों का चयन सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करता है। जनरेटिव एआई ने भ्रामक चित्रों और वीडियो का निर्माण आसान बना दिया है, इसलिए पत्रकारों को बहुस्रोत सत्यापन, तथ्य-जांच और पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नमन अटोलिया और सुमित दहीफले ने अपनी संयुक्त प्रस्तुति में युद्ध के भौतिक, डिजिटल, आर्थिक, कूटनीतिक, सूचनात्मक और मनोवैज्ञानिक आयामों का विश्लेषण किया। उन्होंने मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन, मैलइन्फॉर्मेशन, ग्रे इन्फॉर्मेशन और सिंथेटिक मीडिया की अवधारणाओं को समझाया। एआई-निर्मित लेगो वीडियो, यूएसएस अब्राहम लिंकन पर कथित हमले, तेल अवीव के फर्जी मिसाइल दृश्यों, नकली उपग्रह तस्वीरों और वीडियो गेम से लिए गए दृश्यों के उदाहरणों से बताया गया कि दुष्प्रचार किस प्रकार भय, प्रतिरोध और विजय के नैरेटिव गढ़ता है। वक्ताओं ने ईरान की डिजिटल रणनीति तथा अमेरिका और इज़राइल द्वारा प्रयुक्त मनोवैज्ञानिक अभियानों एवं रणनीतिक भाषा का तुलनात्मक विवेचन भी किया।
उन्होंने बताया कि सूचना युद्ध का लक्ष्य घरेलू नागरिकों, प्रवासी समुदायों, सैनिकों, खुफिया कर्मियों और वैश्विक जनमत को प्रभावित करना है। शिकागो काउंसिल के सर्वेक्षण के माध्यम से अमेरिकी जनमत में युद्ध के प्रति बढ़ती असहमति को रेखांकित किया गया। भारत के लिए राष्ट्रीय सूचना सत्यनिष्ठा रणनीति, स्वदेशी एआई फॉरेंसिक उपकरण, मानवीय सत्यापन, डिजिटल प्रामाणिकता, संकट संचार, सैन्य समन्वय और मीडिया साक्षरता विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
चर्चा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ. बाला लखेंद्र, शिमला के सौरभ चौहान, हरियाणा के डॉ. दयानंद तथा श्रीलंका की संदुरु निवर्थना परेरा ने विचार व्यक्त किए। डॉ. लखेंद्र ने सार्वजनिक मंच पर दिखाई जाने वाली प्रत्येक तस्वीर की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने और तथ्य-जांच साधनों के उपयोग पर बल दिया। अन्य वक्ताओं ने प्रस्तुति की स्पष्टता, शोधपरकता तथा मीडिया और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अंतर्विषयी विश्लेषण की सराहना की। समापन में प्रो. भानावत ने दोनों युवा विशेषज्ञों, प्रतिभागियों तथा सहयोगी जयंत सिंह और पुष्पेंद्र सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सूचना-क्षेत्र की सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का पूरक नहीं, बल्कि अनिवार्य अंग है।
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