तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है? | निज घर चलो | Peaceful Kabir Bhajan | Kabir Bhajan
KabirDivineOfficial
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तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है? | निज घर चलो | Peaceful Kabir Bhajan | Kabir Bhajan
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तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है? | निज घर चलो | Peaceful Kabir Bhajan | Kabir Bhajan
🙏 संत कबीर साहेब की आत्मिक वाणी से प्रेरित यह मौलिक कबीर भजन मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप और अपने “निज घर” की ओर लौटने का संदेश देता है।
जब इंसान दुनिया की माया, मोह, अहंकार और भाग-दौड़ में खुद को भूल जाता है, तब यह भजन उसे भीतर झाँकने और अपने सच्चे घर को पहचानने की याद दिलाता है।
🎵 धीमी और शांत melody | Powerful Clear Voice | Peaceful Kabir Bhajan
अगर आपको Kabir Bhajan, Kabir Saheb Bhajan, Nirgun Bhajan, Peaceful Bhajan और Spiritual Songs पसंद हैं, तो इस भजन को पूरा जरूर सुनें। ❤️
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🎵 FULL SONG LYRICS
तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है?
तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है?
जिसे खोजता बाहर, वो तेरे ही वेश है।
माटी का ये तन है, साँसों का खेल है,
आया है मुसाफिर, जाना अकेला है...
निज घर चलो रे बंदे, निज घर चलो...
जहाँ ना कोई दुख है, ना कोई ग़म है,
जहाँ तेरी आत्मा का सच्चा संगम है...
निज घर चलो रे बंदे, निज घर चलो...
[Verse 1]
महल बनाए ऊँचे, मन फिर भी खाली,
सोने की चादर ओढ़ी, नींद रही कंगाली।
जिसको अपना कहता, पल में वो छूट जाए,
समय की ये आँधी सब कुछ साथ उड़ाए।
काहे का अभिमान रे, काहे का मान?
दो दिन की है दुनिया, दो दिन का जहान।
जिस साँस पे तेरा इतना अधिकार है,
वो साँस भी मालिक की उधार है...
निज घर चलो रे बंदे, निज घर चलो...
अपने अंदर झाँक, बाहर क्यों भटको,
जिसको ढूँढ रहे हो, उसको भीतर देखो...
[Verse 2]
बाज़ार में रिश्ते हैं, रिश्तों में सौदा,
हँसता है चेहरा पर मन है थोड़ा-थोड़ा रोता।
दुनिया की भीड़ में खुद को भूल गया,
माया के मेले में अपना मूल गया।
ना धन तेरा, ना देह तेरी,
ना ये दुनिया, ना शान तेरी।
जब अंतिम बेला द्वार पे आए,
कौन यहाँ फिर साथ निभाए?
तू कौन है बंदे? खुद को पहचान,
कहाँ से आया है, जान अपना स्थान।
जिस घर से आया, वहीं लौट जाना,
झूठे जग से मन को है अब समझाना...
[Mukhda]
निज घर चलो रे बंदे, निज घर चलो...
माया की गलियों में कब तक यूँ भटको?
अपने ही भीतर प्रभु को क्यों ना खोजो?
निज घर चलो रे बंदे, निज घर चलो...
जहाँ प्रेम की ज्योति, जहाँ सच्चा उजियारा,
जहाँ भीतर बैठे हैं साहिब तुम्हारा...
[Verse 3]
एक दिन मिट्टी में मिट्टी मिल जाएगी,
साँसों की डोरी चुपचाप टूट जाएगी।
जिस नाम को भूला, वही काम आएगा,
सच्चा सतगुरु ही पार लगाएगा।
आज समय है तो मन को जगा ले,
अंदर के दीपक को प्रेम से जला ले।
कल का भरोसा करके मत सोना,
जो पल मिला है, उसमें नाम को बोना।
ना मंदिर दूर, ना साहिब दूर,
तेरे ही भीतर है उसका नूर।
आँखें बंद कर, मन को ठहराना,
अपने ही अंदर उसका दर पाना...
[Bridge]
कहाँ ढूँढे रे मनवा, कहाँ ढूँढे रे...
जिसे ढूँढे जग सारा, वो पास खड़ा रे...
मौन में उसकी आवाज़ सुन,
प्रेम में उसका राज़ चुन।
छोड़ दे झूठी दुनिया की आस,
साहिब तेरे हैं तेरे पास...
[Final Mukhda]
तू कौन है बंदे? कहाँ तेरा देश है?
माटी के इस तन में किसका संदेश है?
आया है अकेला, जाना अकेला,
फिर क्यों है मन माया में इतना झमेला?
निज घर चलो रे बंदे... निज घर चलो...
निज घर चलो रे बंदे... निज घर चलो...
जहाँ ना कोई रोना,
जहाँ ना कोई डर,
जहाँ प्रेम ही प्रेम है,
वही है तेरा घर...
निज घर चलो...
निज घर चलो...
निज घर चलो रे बंदे...
अपने निज घर चलो...
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❤️ सुनिए • महसूस कीजिए • आत्मचिंतन कीजिए
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