चलती चक्की देख के कबीरा रोये 😢 | जो आया सो पिस गया | संत कबीर दास जी का भजन
KabirDivineOfficial
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चलती चक्की देख के कबीरा रोये 😢 | जो आया सो पिस गया | संत कबीर दास जी का भजन
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चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये… 🙏
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय।
संत कबीर दास जी की अमर वाणी से प्रेरित यह भावपूर्ण निर्गुण भजन जीवन की सच्चाई, काल की चक्की और संसार की नश्वरता का संदेश देता है।
राजा हो या रंक, इस संसार में हर इंसान को एक दिन समय के आगे झुकना पड़ता है। इसलिए सतगुरु की शरण में आकर राम नाम की ओट लेना ही सच्चा सहारा है। 🕉️🙏
🎵 भजन: चलती चक्की देख के
🙏 संत: कबीर दास जी
🎶 शैली: निर्गुण भजन | कबीर वाणी | आध्यात्मिक भजन
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