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रेखा की माँग में सिंदूर ・ न शादी, न सुहाग ・ चवालीस साल की खामोशी

रील से रियल तक

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रेखा की माँग में सिंदूर ・ न शादी, न सुहाग ・ चवालीस साल की खामोशी

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रील से रियल तक
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बाईस जनवरी उन्नीस सौ अस्सी की उस शाम को आज भी कोई भुला नहीं पाया है, जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह के विवाह समारोह में रेखा सफ़ेद कांजीवरम साड़ी और माँग में गहरा लाल सिंदूर लगाकर पहुँची थीं। उसी हॉल में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन भी मौजूद थे, और उस एक दृश्य ने पूरे देश के सामने ऐसे सवाल खड़े कर दिए जो पिछले चवालीस सालों से अनसुलझे हैं। रेखा ने कभी किसी रिश्ते को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया, फिर भी चार दशकों से हर मंच पर उनकी माँग का वह सिंदूर समाज की मर्यादा और परंपराओं के सामने एक गहरा विरोधाभास बनकर चमकता रहा। उन्नीस सौ नब्बे में पति मुकेश अग्रवाल के असामयिक निधन और भयंकर सामाजिक आलोचनाओं के बाद भी, उस सुर्ख रंग ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा। रेखा ने स्वयं इसके दो परस्पर-विरोधी कारण बताए—कभी इसे दक्षिण का फ़ैशन कहा, तो कभी शूटिंग का भूला हुआ मेकअप। लेकिन क्या यह केवल एक बहाना था, या किसी स्त्री का अपने अनकहे दर्द और वजूद को बिना झुके सहेजने का मूक संकल्प? इस विशेष डॉक्यूमेंट्री पॉडकास्ट में सुनिए भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और भावुक दास्तान, जो केवल एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि हमारे अपने परिवारों के भीतर दबी अनकही बातों का भी एक आईना है।