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मतलब हिन्दू- अम्बर पाण्डेय @VaniPrakashanGroup

Ankit Narwal

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मतलब हिन्दू- अम्बर पाण्डेय @VaniPrakashanGroup

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Ankit Narwal
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यह उपन्यास एक तरह से उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशकों और बीसवीं सदी के शुरुआती दशक में गुजर-बसर करने वाले तात्कालिक भारतीय मानस की पड़ताल करता है। यह कथा हिन्दू मन की पड़ताल भी है। ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ के बीच रस्साकस्सी के दौरान आम-जिन्दगी की दुश्वारियाँ अक्सर पीछे रह जाती हैं। यह कथा महात्मा गांधी जैसे नायक के सामने जिस प्रतिनायक को खड़ा कर रही है, वह दरअसल लोभ-लिप्साओं में घिरी आम-जिन्दगी का परिचायक है। उसकी दुश्वारियाँ उनके जैसा बनने की है, किन्तु वहाँ पहुँचने की राह जिन रास्तों से होकर गुजरती है, वहाँ उसकी पूरी सामाजिक संरचना रुकावट बनकर उपस्थित हो जाती है। या फिर एक मनुष्य की बजाय एक जाति के रूप में विकसित हुई पीढ़ी के लिए वह राह पकड़ना दूर की कौड़ी है। दवे यहाँ जिस आत्मालोचन की स्थिति में है, वह इस उपन्यास की केन्द्रीय धुरी है। #हिंदीसाहित्य #hindiupanyas #उपन्यासकार # #hindisahitya #hindu