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उड़हुल फुलवा चंपा कलिया हो लाल | तोरा रे डाले | मैया के का का बिछइल हो लाल | देवी गीत | मगही लोकगीत

Aruhi Ke Lok Geet

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उड़हुल फुलवा चंपा कलिया हो लाल | तोरा रे डाले | मैया के का का बिछइल हो लाल | देवी गीत | मगही लोकगीत

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Aruhi Ke Lok Geet
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🙏🌺 “उड़हुल फुलवा चंपा कलिया हो लाल, तोरा रे डाले…” — देवी माता की भक्ति और फूलों से जुड़ा एक सुंदर पारंपरिक मगही देवी लोकगीत। 🎶🌸 इस गीत में उड़हुल के फूल और चंपा की कलियों के माध्यम से मैया की पूजा और श्रृंगार का सुंदर लोकभाव प्रस्तुत किया गया है। फूलों की सुंदरता, मैया के प्रति श्रद्धा और पारंपरिक पूजा की भावना इस गीत को बेहद मधुर बनाती है। 🙏🪔 🌺 गीत: उड़हुल फुलवा चंपा कलिया हो लाल 🌸 मुख्य भाव: मैया की पूजा के लिए फूल 🙏 विषय: देवी माता की भक्ति 🎶 भाषा: मगही 🌾 शैली: पारंपरिक देवी लोकगीत हमर माटी | हमर बोली | हमर लोकगीत 🎶 #उड़हुलफूल #चंपाकलिया #देवीगीत #देवीमातालोकगीत #मगहीलोकगीत #DeviGeet #MagahiLokGeet #AruhiKeLokGeet