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‘अयोग्य’ कहकर गुरु ने उतारा पहाड़ से, पर शिष्य की साधना गुरु से भी ऊंची!

आंधी थिएटर

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‘अयोग्य’ कहकर गुरु ने उतारा पहाड़ से, पर शिष्य की साधना गुरु से भी ऊंची!

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झांग यी को उसके गुरु झाओ श्वेनयी ने ‘अयोग्य’ बताकर पर्वत से नीचे भेज दिया। किसी को पता नहीं, उसकी साधना उस सीमा तक पहुँच चुकी है जहाँ गुरु भी नहीं पहुँचे। दुनिया में कदम रखते ही उसकी मुलाकात एक चोटिल युवक, झांग छिंगझी, से होती है। गुरु से सीखी उपचार-विद्या से वह उसकी जान बचा लेता है। विदा होते समय छिंगझी उससे एक विनती करता है: बिछड़े छोटे भाई को ढूँढना। साथ ही वह इशारा कर जाता है कि झांग यी का जन्म-भेद और संसार से उसके कर्म-संबंध अब भी अधूरे हैं। यहीं से शुरू होती है झांग यी की राह—शिष्य और गुरु के बीच अनकही सच्चाइयों का सामना, अपने मूल की खोज, और उस भाई की तलाश जो शायद उसकी किस्मत से गहराई से जुड़ा है। क्या गुरु ने उसे सच में कमज़ोर समझा, या किसी बड़े कारण से दूर किया? झांग यी कौन है, और उसके ऊपर कौन सा अधूरा ऋण बाँका रह गया? हर मोड़ पर उसकी करुणा, उसकी साधना और उसके रिश्ते परीक्षा में पड़ते हैं। उत्तर मिलते हैं, पर हर उत्तर एक नई गुत्थी खोल देता है।