Перейти к содержимому

अच्छे कर्म करता जा बंदे, कभी बेकार नहीं जाती | कबीर वाणी निर्गुण भजन | Emotional Spiritual Bhajan

KabirDivineOfficial

0:00 / 0:00

अच्छे कर्म करता जा बंदे, कभी बेकार नहीं जाती | कबीर वाणी निर्गुण भजन | Emotional Spiritual Bhajan

2 198 просмотров · 3 дня назад
KabirDivineOfficial
2,17 тыс. подписчиков
2 198 просмотров · 3 дня назад
अच्छे कर्म करता जा बंदे, कभी बेकार नहीं जाती | कबीर वाणी निर्गुण भजन | Emotional Spiritual Bhajan 🙏 Hashtags #कबीरवाणी #कबीरसाहेब #कबीरभजन #निर्गुणभजन #अच्छेकर्म #प्रेरकभजन #आध्यात्मिकभजन #EmotionalBhajan #SpiritualBhajan #KabirVani #KabirBhajan #NirgunBhajan #SantKabirDas #HindiBhajan #BhaktiBhajan #संतकबीरदास #सच्चाई #मानवता #कर्म #भक्ति 🎶 Full Song Lyrics मुखड़ा अच्छे कर्म करता जा बंदे, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। सूनी धरती पर बोया सच भी, एक दिन खुशबू बनकर आती। अच्छे कर्म करता जा बंदे, राह भले ही कठिन दिखाई दे, नेकी की छोटी सी चिंगारी, अँधियारे में दीप जलाती है। अंतरा 1 जिस हाथ से तू रोटी बाँटे, उस हाथ में बरकत रहती है। जिस होंठ से तू सत्य सुनाए, उस वाणी में ताकत रहती है। दुनिया चाहे भूल जाए तुझको, कर्म कभी अनजान नहीं होते। समय की आँखों में लिखे हुए, अच्छे कर्म बेनाम नहीं होते। अंतरा 2 किसी गिरे को हाथ दे देना, सबसे बड़ा सहारा है। किसी उदास चेहरे पर हँसी रख देना, यही प्रेम का इशारा है। बदले में कुछ माँग मत लेना, नेकी को व्यापार न करना। जिसने दिल से भलाई कर दी, उसने जीवन पार किया समझना। मुखड़ा अच्छे कर्म करता जा बंदे, फल की चिंता छोड़ दे। तेरा काम है बीज बचाना, फल को समय की ओर छोड़ दे। अंतरा 3 आज अगर तेरी राह में काँटे, कल फूल भी खिल सकते हैं। आज तेरे अपने चुप बैठे हैं, कल तेरे साथ मिल सकते हैं। वक्त किसी का एक सा रहता, न सुख सदा, न दुख ठहरता। जो धीरज से कर्म निभाता, वही तूफानों में भी निखरता। अंतरा 4 झूठ कमाई घर तो भर दे, मन को खाली छोड़ जाएगी। सच्ची मेहनत थोड़ी हो फिर भी, नींद सुकून की दे जाएगी। महल खड़े कर क्या पाया तू, यदि भीतर डर बैठा है? छोटी कुटिया धन्य वही है, जिसमें मन निर्मल रहता है। अंतरा 5 किसी की पीठ पीछे बोलकर, अपना कद ऊँचा मत करना। दूसरों के दीप बुझाकर, अपने घर को रोशन मत करना। जो तेरा है मेहनत से ले ले, जो पराया है छोड़ दे। मन के लोभ की रस्सी काटकर, सच्चे जीवन से नाता जोड़ ले। अंतरा 6 कबीर की सीख यही मनवा, देह मिली तो काम कर। साँसों की यह छोटी पूँजी, इसे न झूठे नाम कर। जब अंतिम घड़ी सामने होगी, धन-दौलत कुछ साथ न जाएगी। लोग कहेंगे कैसा जीया था, बस तेरी करनी याद आएगी। अंतिम मुखड़ा अच्छे कर्म करता जा बंदे, कभी बेकार नहीं जाती। सूखे मन में प्रेम का पानी, एक दिन हरियाली लाती। तू चलता जा सत्य की डगर पर, चाहे दुनिया देर लगाए। कर्म की खुशबू दूर तलक रे, समय स्वयं पहचान कराए। समापन आज किसी का दर्द समझ ले, आज किसी का भार उठा ले। आज किसी को माफ कर दे, आज किसी को पास बिठा ले। साँस रहे तब तक अच्छा कर ले, कल का कोई भरोसा नहीं। नेकी का बीज भले देर से फूटे, पर उसकी मिट्टी बाँझ नहीं। अच्छे कर्म करता जा बंदे, मन में सच्चाई रखता जा। दुनिया तुझको याद करे न करे, अपने रब को साक्षी रखता जा। 🙏