कामधेनु गौमाता - EP 23 - इंद्र ने गौ माता कामधेनु से माँगी क्षमा | तिलक
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कामधेनु गौमाता - EP 23 - इंद्र ने गौ माता कामधेनु से माँगी क्षमा | तिलक
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इंद्र सहित समस्त देवी-देवता गौ माता कामधेनु को प्रणाम कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। तभी गोलोक से श्रीहरि नारायण उन्हें पूर्णदेवी घोषित करते हुए कहते हैं कि उनके स्पर्श और सेवा से समस्त देवी-देवताओं की पूजा का फल मिलेगा और वे समस्त पापों का नाश करने वाली कहलाएँगी। लज्जित इंद्र उन्हें माता मानकर क्षमा माँगते हैं और कामधेनु स्नेहपूर्वक उन्हें क्षमा कर देती हैं। फिर इंद्र अपने अपराधों के लिए गुरु बृहस्पति से भी क्षमा माँगते हैं। उधर गुरु शुक्राचार्य दैत्यों को बताते हैं कि कामधेनु को पाने के लिए उन्हें छलयुक्त भक्ति का मार्ग अपनाना होगा, जिसे सुनकर सभी दैत्य प्रसन्न हो जाते हैं। वहीं वशिष्ठ आश्रम में आकाश में विचित्र तरंगें उठने लगती हैं। महर्षि वशिष्ठ समझ जाते हैं कि यह राजऋषि कौशिक की तपशक्ति का प्रभाव है, जो ब्रह्मर्षि बनने के साथ-साथ कामधेनु को प्राप्त करने के संकल्प में कठोर तप कर रहे हैं।
Indra and all the gods bow to Gau Mata Kamdhenu and thank her. Lord Narayan calls her Purnadevi and says that serving her will bring blessings and remove all sins. Indra asks Kamdhenu for forgiveness, and she lovingly forgives him. He also apologizes to Guru Brihaspati, and Kamdhenu asks the Guru to forgive him. Meanwhile, Guru Shukracharya tells the demons to pretend to be devoted to Kamdhenu so they can get her. The demons agree to his plan. At Vashishtha’s ashram, strange waves appear in the sky. Vashishtha realizes that Kaushik’s intense penance is causing these changes. Kaushik is determined to become a Brahmarishi and obtain Kamdhenu.
"जो समुद्र मंथन से प्रकट हुए 14 रत्नों में से एक हैं, श्रीकृष्ण के हृदय में विराजमान हैं, मनवांछित वर प्रदान करती हैं, दुष्टों का संहार और संतों का उद्धार करती हैं तथा ऋषि-मुनियों की पूजनीय हैं, वह हैं माता कामधेनु! माता कामधेनु सृजन, समृद्धि और कल्याण की देवी हैं। समुद्र मंथन से प्रकट होकर उन्होंने समस्त लोकों के पालन-पोषण का दायित्व संभाला। उनका महात्म्य ऐसा है कि वे भगवान श्रीकृष्ण से लेकर ऋषि-मुनियों तक के हृदय में युगों-युगों से विराजमान हैं। माता कामधेनु की कृपा से जीवन में सौभाग्य के बंद द्वार खुल जाते हैं। माता कामधेनु की यह महागाथा उनके मातृत्व की ममता, महिमा और दिव्यता का प्रतिबिंब है।
यह शो मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रंथों पर आधारित है—
गौ अंक
हरिवंश पुराण
विष्णु पुराण
गरुड़ पुराण
श्रीमद्भागवत महापुराण
ब्रह्मवैवर्त पुराण
स्कंद पुराण
शोध
श्रीकांत विश्वकर्मा
विनय द्विवेदी
कहानी
प्रेम सागर एवं शिव सागर
पटकथा
श्रीकांत विश्वकर्मा
संवाद
विनय कुमार
संगीत
सूर्य राज कमल
शीर्षक गीत
सतीश देहरा
बैकग्राउंड संगीत
लेनिन नंदी
गीतकार
सुरेश तिवारी
पोस्ट हेड
रॉबिन शर्मा
क्रिएटिव डायरेक्टर
शिव सागर
एसोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर
अभिषेक चौबे
छायांकन निर्देशक (डीओपी)
प्रकाश जनार्दन शिंगाड़
द्वितीय इकाई निर्देशक
धवल दर्जी
निर्देशक
राकेश रामनलाल व्यास
निर्माता
प्रेम सागर
नीलम सागर
शिव सागर
सेलेक्ट मीडिया होल्डिंग्स
कलाकार
हरलीन कौर — गौ माता कामधेनु
विशाल नायक — कृष्ण
नेहा परदेशी — राधा
अनमोल सोनी — महादेव
संदीप मोहन — वशिष्ठ
सुगंधा — अरुंधती
प्रियांशी रघुवंशी — पार्वती
ज्ञानेश्वर कुमार राय — ब्रह्मा
रोहित देवड़ा — इंद्र
अलिका नायर — शची
आकाश सिसोदिया — बलि
शुभम सेहरावत — विश्वरथ
हरमिंदर कौर — विश्वरथ की पत्नी
मनदीप कौर — गंगा
शेखर मेहता — शांतनु
देवानंद पाठक — परशुराम
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