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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 | अर्जुनविषादयोग | गीता तत्त्वालोक | उड़िया बाबा जी महाराज | Namamritam

नामामृतम्

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 | अर्जुनविषादयोग | गीता तत्त्वालोक | उड़िया बाबा जी महाराज | Namamritam

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नामामृतम्
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॥ श्री परमात्मने नमः ॥ ॥ जय श्री राधे ॥ श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय १ : अर्जुनविषादयोग पूज्य श्री उड़िया बाबा जी महाराज विरचित ‘श्री गीतातत्त्वालोक’ के आधार पर सरल हिन्दी में गीता का भावपूर्ण विवेचन। कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं। शंखनाद हो चुका है और युद्ध आरम्भ होने वाला है। किन्तु जब महान धनुर्धर अर्जुन अपने सामने भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य तथा अपने ही बन्धु-बान्धवों को देखते हैं, तब उनके मन में एक गहरा धर्मसंकट उत्पन्न हो जाता है। क्या अपने ही स्वजनों का वध करके प्राप्त किया गया राज्य सुख दे सकता है? क्या युद्ध से कुलधर्म और पारिवारिक परम्पराओं का विनाश नहीं होगा? क्या करुणा के कारण अपने कर्तव्य से पीछे हट जाना उचित है? इन्हीं प्रश्नों और अर्जुन के अन्तर्द्वन्द्व से श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेश की भूमिका तैयार होती है। इस प्रथम अध्याय में जानिए— धृतराष्ट्र ने कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहकर क्या पूछा? दुर्योधन ने गुरु द्रोणाचार्य के सामने दोनों सेनाओं का वर्णन कैसे किया? श्रीकृष्ण और अर्जुन के दिव्य शंखनाद का प्रसंग। स्वजनों को देखकर अर्जुन के मन में विषाद क्यों उत्पन्न हुआ? आततायी, कुलधर्म, अधर्म और वर्णसंकर के विषय में अर्जुन के तर्क। अर्जुन ने अपना गाण्डीव धनुष क्यों त्याग दिया? अर्जुन का विषाद भगवद्गीता के उपदेश की भूमिका कैसे बना? इस प्रस्तुति में गीता के महत्त्वपूर्ण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ उनका सरल हिन्दी अर्थ एवं भावार्थ प्रस्तुत किया गया है, जिससे श्रोता अध्याय के घटनाक्रम और उसके आध्यात्मिक सन्देश को सहजता से समझ सकें। हमारा उद्देश्य पूज्य श्री उड़िया बाबा जी महाराज के ‘श्री गीतातत्त्वालोक’ के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के तत्त्वज्ञान को सरल, प्रामाणिक और श्रवणयोग्य रूप में प्रस्तुत करना है। यह श्रृंखला केवल गीता की कथा सुनाने के लिए नहीं, बल्कि उसके उपदेशों को समझकर जीवन में उतारने की प्रेरणा देने के लिए है। आगामी अध्याय — अध्याय २ : सांख्ययोग, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा की नित्यता, कर्तव्य और समत्व का उपदेश देना आरम्भ करते हैं। ग्रन्थ आधार: श्री गीतातत्त्वालोक मूल ग्रन्थकार: परम पूज्य श्री उड़िया बाबा जी महाराज प्रस्तुति: नामामृतम् (Namamritam) यदि आप श्रीमद्भगवद्गीता का गम्भीर किन्तु सरल अध्ययन करना चाहते हैं, तो नामामृतम् के साथ इस अध्यायवार यात्रा में जुड़ें। चैनल को Subscribe करें और इस श्रृंखला को अन्य गीता-प्रेमियों के साथ साझा करें। ॥ श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥ ॥ हरिः ॐ तत्सत् ॥ #BhagavadGita #GeetaTatvaLok #UdiyaBaba #ArjunVishadYog #BhagavadGitaChapter1 #ShrimadBhagavadGita #Namamritam #GeetaInHindi #SanatanDharma #krishnaupdesh #krishna #krishnabhajan #radhakrishna #radha #bhakti #bhaktisong #gita #geeta #geetagyan #geetasaar