🌿 हाजी मुख्तयार अली मेव — मेवात से गुना तक हिजरत, मेहनत और विरासत की कहानी
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🌿 हाजी मुख्तयार अली मेव — मेवात से गुना तक हिजरत, मेहनत और विरासत की कहानी
मेवात की पाक मिट्टी से निकलकर अलग-अलग दौर में हमारे बुज़ुर्गों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर नई बस्तियाँ बसाईं। ऐसी ही एक हिजरत की दास्तान हाजी मुख्तयार अली मेव के परिवार से जुड़ी है। उनके पूर्वजों का मूल संबंध मुलिया खेड़ा, पोस्ट रसलागिरी, तहसील लक्ष्मणगढ़, जिला अलवर (राजस्थान) से रहा और 1857 के बाद परिवार ने मेवात से हिजरत कर मध्य प्रदेश के गुना क्षेत्र में अपना नया ठिकाना बनाया।
वक्त बदला, जगह बदली, लेकिन मेवाती पहचान और अपनी जड़ों से मोहब्बत आज भी कायम है। हाजी मुख्तयार अली मेव ने समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सरपंच के रूप में समाज के लिए अपनी सेवाएँ दीं।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम मेव परिवारों की कहानी है जिन्होंने हिजरत के सफर में नई जमीन पर अपना भविष्य बनाया, मगर दिल में अपनी पुरानी मिट्टी को हमेशा ज़िंदा रखा। ❤️
हिजरत ने ठिकाना बदला, मगर पहचान नहीं…
मेवात से रिश्ता आज भी दिल में कायम है। 🌿
मेवात की तारीख़ • मेवात की ज़ुबानी • अपनी विरासत
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