Maa Siddhidatri Stuti | Navratri Navami Special | Navratri Day 9 | Divine Stotram of Maa Siddhidatri
Trivenee Bhakti Vani
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Maa Siddhidatri Stuti | Navratri Navami Special | Navratri Day 9 | Divine Stotram of Maa Siddhidatri
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Trivenee Bhakti Vani
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॥ माँ सिद्धिदात्री स्तुति ॥ 🙏 | नवरात्रि नवमी विशेष | Navratri Day 9 | सिद्धिदात्री माता का दिव्य स्तोत्र
📝 Description
🙏 जय माँ सिद्धिदात्री 🙏
नवरात्रि की नवमी तिथि पर माँ सिद्धिदात्री की यह दिव्य स्तुति श्रद्धा और भक्ति के साथ सुनें। 🌺
माँ सिद्धिदात्री को नवदुर्गा का नौवाँ स्वरूप माना जाता है। उनकी कृपा से साधक को शांति, भक्ति, सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
🌸 Navratri Day 9 Special 🌸
यह भक्तिमय स्तुति माँ सिद्धिदात्री के चरणों में समर्पित है। इसे श्रद्धापूर्वक सुनें और माँ का आशीर्वाद प्राप्त करें। 🙏
🔱 जय माता दी | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः 🔱
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ॐ श्रीं ह्रीं सिद्धिदात्र्यै नमः।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हे जगदम्बे! हे वरदायिनि!
हे भक्तजनहितकारिणि!
तव चरणयोः प्रणमामि मातः,
देहि कृपां हे सिद्धिदात्रि!
जय जय हे सिद्धिदात्री माता,
जय जय जगजननी सुखदाता।
कमलासन पर शोभित भवानी,
करुणामयी अम्बे कल्याणी॥
सिद्धि-बुद्धि की दात्री माता,
भक्तजनों के हृदय-विधाता।
तेरी महिमा गाएँ हम माता,
तेरा नाम हृदय में समाता॥
जय जय हे सिद्धिदात्री माता,
जय जय जगजननी सुखदाता॥
श्वेताम्बरधरा देवि, शान्तिसौभाग्यदायिनि।
प्रसन्नवदने मातः, भक्तानुग्रहकारिणि॥
कमलस्थिता शुभे देवि, दिव्यतेजोविलासिनि।
दुःखशोकहरा मातः, मङ्गलानां प्रकाशिनि॥
त्वमेव जननी नित्यं, त्वमेव परमं धनम्।
त्वमेव शरणं देवि, त्वमेव मम जीवनम्॥
जय जय हे सिद्धिदात्री माता,
जय जय जगजननी सुखदाता॥
अणिमाद्यष्टसिद्धीनां, दात्रि देवि नमोऽस्तु ते।
भक्तानां शुभकामानां, पूर्तये ते नमो नमः॥
ज्ञानदीपप्रदात्री त्वं, भक्तिमार्गप्रदर्शिनी।
अन्तर्यामिनि अम्ब त्वं, शान्तिदा सुखवर्धिनी॥
न मे कामः स्वार्थयुक्तः, न मे लोभो न च स्पृहा।
भक्तिरस्तु पदे मातः, एषा मे परमाऽऽशा॥
हे सिद्धिदात्रि जगदम्बे,
कृपया पाहि मां सदा।
त्वत्प्रसादेन मे मातः,
वर्धतां भक्तिभावना॥
जगद्धात्रि जगन्मातः, जगदाधाररूपिणि।
जगत्पालिनि कल्याणि, जगदानन्ददायिनि॥
शिवशक्तिस्वरूपिणि, दिव्यज्ञानप्रकाशिनि।
सर्वदेवस्तुते मातः, सर्वमङ्गलकारिणि॥
नमस्ते कमलहस्ते, नमस्ते भक्तवत्सले।
नमस्ते दिव्यरूपे, नमस्ते विश्वपालिनि॥
मातः त्वमेव मे बन्धुः, मातः त्वमेव मे गतिः।
त्वत्पादसेवया नित्यं, भवतु मे शुभा मतिः॥
जय जय हे सिद्धिदात्री माता,
जय जय जगजननी सुखदाता॥
शैलपुत्री च ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा महाबला।
कूष्माण्डा स्कन्दमाता च, कात्यायनी शुभप्रदा॥
कालरात्रिर्महागौरी, सिद्धिदात्री नमोऽस्तु ते।
नवदुर्गास्वरूपिण्यै, भक्त्या नित्यं नमो नमः॥
नवशक्तिस्वरूपा त्वं, नवमङ्गलदायिनी।
नवमीपावने काले, पूजिता सुखदायिनी॥
नवरात्रस्य पुण्येऽस्मिन्, दीपाः सन्तु गृहे गृहे।
भक्तिगीतध्वनिः पुण्या, गुञ्जतां हृदये हृदये॥
अज्ञानतिमिरं देवि, ज्ञानदीपेन नाशय।
चित्ते मे निर्मलां भक्तिं, प्रेमभावं च वर्धय॥
वाणीं देहि शुभां मातः, कर्म देहि शुभप्रदम्।
सत्पथं दर्शय देवि, जीवनं कुरु मङ्गलम्॥
क्रोधलोभविनिर्मुक्तं, निर्मलं मे मनो भवेत्।
सेवाभावसमायुक्तं, जीवनं मे सदा भवेत्॥
सर्वेषां हृदि मातस्त्वं, प्रेमदीपं प्रज्वालय।
सर्वे भवन्तु सुखिनः, इति भावं विवर्धय॥
हे अम्बिके दयामूर्ते, हे जगदम्ब सनातनि।
त्वामहं शरणं प्राप्तः, पाहि मां परमेश्वरि॥
न जानामि स्तुतिं सम्यक्, न जानामि तवर्चनम्।
भक्त्या कृतं मया स्तोत्रं, गृहाण परमेश्वरि॥
अल्पज्ञानं च मे मातः, अल्पशक्तिश्च मे सदा।
तव कृपाबलं लब्ध्वा, सेवां कुर्यां पुनः पुनः॥
मातः सिद्धिप्रदे देवि, प्रसन्ना भव सर्वदा।
त्वत्पादकमले भक्तिः, वर्धतां जन्मजन्मनि॥
गृहे गृहे शुभं भूयात्, हृदये प्रेम वर्धताम्।
सद्भावना च सर्वत्र, शान्तिधारा प्रवहतु॥
बालवृद्धजनाः सर्वे, लभन्तां सुखसम्पदम्।
दुःखितानां मुखे मातः, हास्यपुष्पं विराजताम्॥
प्रकृतिः पावनी भूयात्, धरित्री सुखदायिनी।
सर्वजीवहिते नित्यं, प्रेरणा देहि अम्बिके॥
जयतु भक्तिरसः पुण्यः, जयतु मातृमहिम्नता।
जयतु सिद्धिदात्री देवी, जयतु करुणाम्बिका॥
जयति जयति सिद्धिदात्री, जय अम्बे जगदम्ब।
भक्तहृदयविहारिणि, पूरण करुणाकन्द॥
कमलहस्ते वरदायिनि, शान्तिसुखप्रदायिनि।
सर्वमङ्गलकारिणि, पाहि विश्वजननि॥
तेरे चरणों में माँ, श्रद्धा के फूल चढ़ाएँ।
तेरी कृपा का अमृत, जीवन में हम पाएँ॥
जय जय हे सिद्धिदात्री माता,
जय जय जगजननी सुखदाता।
कमलासन पर शोभित भवानी,
करुणामयी अम्बे कल्याणी॥
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥