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हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । Lyerics- अभिलाषा बेन

आत्मन भक्ति धारा

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हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । Lyerics- अभिलाषा बेन

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आत्मन भक्ति धारा
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हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । हो मुनिराज सी क्षमता अंदर में मेरे विचरु जंगल में एकाकी निजानंद के लिए उन्हें दिखा न कोई सार और दुनिया में उन्हें दिखा न कोई आधार और दुनिया में बस दिख रहा था एक ज्ञायक दृष्टि के लिए हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । हो मुनिराज सी क्षमता अंदर में मेरे करते एकांत में बाते वो स्वयं से ही,, भय न किंचित लगे उनको लखे स्वयं को ही उन्हें जंगल में भी मंगल दिखा स्वयं के लिए हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । हो मुनिराज सी क्षमता अंदर में मेरे शांत मुद्रा जिनकी निरखकर सहज ही शांति मिलती सुख न बाहर में कहीं है, भ्रांति सारी टलती सुख का भंडार बताते है वो स्वयं के लिए हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । हो मुनिराज सी क्षमता अंदर में मेरे भावना हर क्षण भाऊ ऐसा बनने की छोडकर सारे ही बंधन ध्याऊ में भी निज को ही अबंध स्वरुपी बताते है हमारे लिए हो मुनिराज सी समता अंदर में मेरे । हो मुनिराज सी क्षमता अंदर में मेरे विचरु जंगल में एकाकी निजानंद के लिए