योगसूत्र - 2.36 - सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ॥ ३६
विद्यावाहिनी
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योगसूत्र - 2.36 - सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ॥ ३६
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सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ॥ ३६ ॥ (सत्य-प्रतिष्ठा-याम् क्रिया-फल-आश्रय-त्वम्)
सूत्र संख्या: साधन पाद, सूत्र 36 (2.36)
महत्वपूर्ण FAQ और टाइमस्टैम्प (FAQ & Timestamps)
01:05 - पतंजलि योग सूत्र 2.36 क्या है? / What is Patanjali Yoga Sutra 2.36? यह सूत्र सत्य की शक्ति और उसके प्रभाव को गहराई से समझाता है।
01:36 - 'सत्य प्रतिष्ठायाम' का वास्तविक अर्थ क्या है? / What is the real meaning of 'Satya Pratisthayam'? इसका अर्थ है सत्य में पूरी तरह और मजबूती से स्थापित हो जाना।
02:03 - 'अचूक वाणी' का रहस्य क्या है? / What is the secret of 'Infallible Speech'? सत्यवादी व्यक्ति की वाणी अमोघ हो जाती है, उनके शब्द हकीकत बन जाते हैं।
03:06 - क्या सत्य से बिना कर्म के फल मिल सकता है? / Can truth grant results without action? हाँ, एक सत्यनिष्ठ योगी अपनी संकल्प शक्ति से प्राकृतिक नियमों को लांघ सकता है।
04:30 - सत्य की शक्ति का ब्रह्मांडीय आधार क्या है? / What is the universal basis of the power of truth? सत्य ही पूरे अस्तित्व की नींव है, जिससे जुड़कर व्यक्ति ब्रह्मांडीय स्रोत से जुड़ जाता है।
वीडियो विवरण (Video Description)
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई इंसान जीवन भर सिर्फ सच बोले, तो क्या होगा? इस वीडियो में हम महर्षि पतंजलि के योग सूत्र के माध्यम से सत्य बोलने के पीछे छिपे उस रहस्यमय और शक्तिशाली विज्ञान का विश्लेषण करेंगे, जो आपकी वास्तविकता को बदल सकता है। जानिए कैसे 'सत्य प्रतिष्ठा' से वाणी अमोघ हो जाती है और कैसे एक योगी बिना किसी भौतिक कर्म के भी फल प्राप्त कर सकता है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक समझ का यह अद्भुत संगम आपको सत्य की असली ताकत से परिचित कराएगा।
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