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रात्रिसूक्त में महाकाली का गुप्त उल्लेख | ऋग्वेद 10.127 | तमोमयी शक्ति और योगनिद्रा का रहस्य

moti singh Rathore

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रात्रिसूक्त में महाकाली का गुप्त उल्लेख | ऋग्वेद 10.127 | तमोमयी शक्ति और योगनिद्रा का रहस्य

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moti singh Rathore
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रात्रिसूक्त में महाकाली का उल्लेख - वैदिक और पौराणिक संगम ऋग्वेद १०.१२७ और अथर्ववेद १९.४७-४८ का रात्रिसूक्त रात्रि को दैवी शक्ति रूप में प्रस्तुत करता है - तमोमयी, सुषुप्तिकारी, सर्वव्यापी। यद्यपि प्रत्यक्ष नाम नहीं, पर विशेषताएं दुर्गासप्तशती की महाकाली से गहराई से मिलती हैं। १. तमोमयी शक्ति: रात्रिसूक्त (१९.४७.१) - "त्वेषं तमः" - चमकता अंधकार सप्तशती (१.१) - महाकाली तमोगुण की अधिष्ठात्री, योगनिद्रा - काली छवि = रात्रि का तमस्विनी रूप २. सुषुप्ति और योगनिद्रा: ऋग्वेद १०.१२७.१२ - संवेशिनी, संयमनी - सबमें निद्रा रूप में प्रवेश कर नियंत्रित करने वाली महाकाली विष्णु को सुषुप्ति में ले जाती हैं - दोनों अवचेतन और विश्राम की अधिष्ठात्री ३. सर्वव्यापकता: "पार्थिवं रजः अप्रायि, दिवः सदांसि वि तिष्ठसे" - पृथ्वी, अंतरिक्ष, द्युलोक व्यापिनी महाकाली सृष्टि के हर स्तर पर असुरों का नाश करती हैं मुख्य मंत्र विश्लेषण: अथर्व १९.४७.१ - आ रात्रि पार्थिवं... आ त्वेषं तमः - महाकाली की संहारक-पुनर्जनन शक्ति १९.४७.२ - उर्वि तमस्वति, भद्रे - विशाल अंधकारमयी पर कल्याणकारी = भद्रकाली / स्मशानकाली ऋग्वेद १०.१२७.१२ - नक्षत्रमालिनीं, शिवां रात्रीं = तारा महाविद्या और श्यामा रूप १९.४८.६ - घृताची, वित्तेऽधि जाग्रति - प्रकाशदायिनी, ज्ञानमयी, सतत जागृत = महाकाली की ज्ञान शक्ति व्याकरण: अमरकोश में रात्रि पर्याय - श्यामा, तमस्विनी, घृताची, तारकिणी - ये सभी महाकाली के ही नाम। दार्शनिक: तमोगुण - सृष्टि-स्थिति-संहार का संतुलन। सुषुप्ति = योगनिद्रा = अवचेतन से सामना। जागृति = आत्म-ज्ञान। जंग के Shadow सिद्धांत से भी मेल - रात्रि/महाकाली अवचेतन की दमित प्रवृत्तियों पर विजय। निष्कर्ष: रात्रि के विशेषण - तमस्वति, घृताची, नक्षत्रमालिनी, भद्रे - महाकाली के योगनिद्रा, चामुण्डा, भद्रकाली, तारा रूपों के ही वैदिक संकेत हैं। अज्ञान से ज्ञान की यात्रा। 🌺 जय माता दी 🙏 #RatriSukta #Mahakali #Rigveda #Atharvaveda #Yoganidra #DurgaSaptashati #VedicScience #bhakti #rathorebhinchari #jaishriram