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प्यारा लागे गुरु जाऊँ दौड़ के | ओ माता मौरी | गुरु राम | संयम गीत | Jain Bhajan

ram guru ki jay и ещё 2

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प्यारा लागे गुरु जाऊँ दौड़ के | ओ माता मौरी | गुरु राम | संयम गीत | Jain Bhajan

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“प्यारा लागे गुरु जाऊँ दौड़ के” एक भावपूर्ण संयम एवं गुरु भक्ति गीत है, जो गुरु राम के प्रति श्रद्धा, समर्पण और वैराग्य की भावना को व्यक्त करता है। “ओ माता मौरी, ये बंधन डोरी, जाऊँगी मैं तोड़ के, प्यारा लागे गुरु जाऊँ दौड़ के…” गुरु राम की भक्ति और गुरु के पावन मार्ग पर चलने की प्रेरणा से ओत-प्रोत यह गीत संयम, धर्म और आत्मकल्याण की भावना को समर्पित है। 🙏 🎵 Song: प्यारा लागे गुरु जाऊँ दौड़ के 🙏 Guru: गुरु राम 🕉️ Category: संयम गीत | गुरु भक्ति | Jain Bhajan अगर यह गीत आपको पसंद आए तो Like 👍 | Share 📲 | Subscribe 🔔 जरूर करें। 💬 Comment में लिखें — “जय गुरु राम” 🙏 गुरु राम के चरणों में कोटि-कोटि नमन। 🙏 प्यारा लागे गुरु जाऊं दौड़ के, गुरु राम, जय गुरु राम, गुरु राम भजन, गुरु राम गीत, संयम गीत, गुरु भक्ति गीत, जैन भजन, Jain Bhajan, Jain Song, Jain Diksha Geet, दीक्षा गीत, वैराग्य गीत, गुरु भक्ति, जैन धर्म, Jain Bhakti Song, Jain Diksha Song #️⃣ Hashtags #गुरुराम #जयगुरुराम #प्यारालागेगुरु #संयमगीत #गुरुभक्ति #जैनभजन #JainBhajan #JainDiksha #JainSong ओ माता मौरी, ये बंधन डोरी, जाऊँगी मैं तोड़ के, प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ ओ माता मौरी, ये बंधन डोरी, जाऊँगी मैं तोड़ के, प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ कुक्षी में तेरी आई थी माता, एक प्रण मैंने धारा था कुक्षी में तेरी आई थी माता, एक प्रण मैंने धारा था यथा समय में संयम लूँगी, ऐसा मैंने चाहा था यथा समय में संयम लूँगी, ऐसा मैंने चाहा था गुरु प्यारे, दर्शन पाए, मनवा हर्ष मनाए घड़िया आई, संयम सुखदाई, कुटुम्भ सारा छोड़ के प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ मिल जाए मानव तन, लेकिन, बोधि मिलना दुर्लभ है मिल जाए मानव तन, लेकिन, बोधि मिलना दुर्लभ है मौका सुनहरा आया माता, कर्ज चुका दूँगी अब मैं मौका सुनहरा आया माता, कर्ज चुका दूँगी अब मैं भाग्य जगाए ,भाव जो आए, जग से जी घबराए ममता छोड़ो, आशीष अब देदो, कहूँ मैं कर जोड़ के प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ भव-भव में भ्रमती-भ्रमती मैं, पाया ना मैंने विश्राम भव-भव में भ्रमती-भ्रमती मैं, पाया ना मैंने विश्राम तन खौखा कब दे-दे धोखा, कब हो जाए साँस तमाम तन खौखा कब दे-दे धोखा, कब हो जाए साँस तमाम गुरु बताए, धर्म सिखाए, समय गुजर ना जाए bhi अब ना रुकूँ, ये मौका ना चूकूँ, देखूँ ना मूख मोड़ के प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ माता कहती धन्य हुई में ,एसी बिटिया पायी है, माता कहती धन्य हुई में ,एसी बिटिया पायी है, कौन सी करनी करके आई, घर-घर खुशियाँ छाई है कौन सी करनी करके आई, घर-घर खुशियाँ छाई है दुनिया खारी, बंधन भारी, माँ कहती हैं प्यारी बेटी जाओ, ना क्षण ये गँवाओ, बंधन सारे तोड़ के प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥ ओ माता मौरी, ये बंधन डोरी, जाऊँगी मैं तोड़ के, प्यारा लागे गुरु जाऊ दौड़ के॥