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Mahadev Chidambar – Mujh Mein Tum | हे महादेव चिदम्बर – मुझ में तुम | Shunyam Satyam Shivam

RUDRUNMATTA

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Mahadev Chidambar – Mujh Mein Tum | हे महादेव चिदम्बर – मुझ में तुम | Shunyam Satyam Shivam

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यह गीत महादेव से एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक गहरा आत्म-संवाद है। जब जग भी वही है, दृष्टि भी उसी की देन है, और साक्षी भी वही है — तो फिर “मैं” कौन हूँ? मुझ में तुम… फिर मैं, मैं कैसा? यह रचना धीरे-धीरे भक्ति से आत्म-विचार की ओर जाती है — द्रष्टा कौन? ज्ञाता कौन? साक्षी कौन? कर्ता कौन? स्रष्टा कौन? मैंने शिव को बनाया… या शिव ने मुझे? अंततः प्रश्न वहीं पहुँचता है — मैं मिटा… या केवल भेद मिटा? A meditative Shiva song inspired by Chidambaram, Advaita, Shunyam, Satyam and Shivam — a journey from devotion into self-inquiry. ---------------------------------- Lyrics | गीत के बोल हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… शान्तम्… शून्यम्… अनन्तम्… ये जग बना… तेरे ध्यान में? ध्यान शून्य का… शून्य में जग… जग में मैं… मुझ में तुम… अन्तः शिवः… साक्षी शिवः… मुझ में तुम… मुझ में तुम… ये जग तेरा… मैं तेरा… फिर मुझे क्यों दिखा — कुछ सत्य… कुछ असत्य… कुछ अपना… कुछ पराया… कुछ शुभ… कुछ अशुभ… कुछ पूर्ण… कुछ अपूर्ण… सत्यम्… असत्यम्… शुभम्… अशुभम्… जब जग तुम्हारा है… तो भेद मेरा क्यों? द्वैतं कुतः? भेद कहाँ? ये आँख तुम्हारी देन… पर दृष्टि मेरी क्यों? ये जग तुम्हारा… पर अर्थ मेरा क्यों? जो मुझे सत्य दिखा… क्या वही सत्यम्? जो मुझे असत्य दिखा… क्या वही शून्यम्? हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… मुझ में तुम… मुझ में तुम… फिर मैं… मैं कैसा? मुझ में तुम… मुझ में तुम… फिर ये भेद… कैसा? शून्यम्… शून्यम्… चिदम्बरम्… सत्यम्… सत्यम्… शिवम्… जो देख रहा है… वह मैं? या तुम? द्रष्टा कः? जो जान रहा है… वह मैं? या तुम? ज्ञाता कः? जो निद्रा में भी जाग रहा है… वह कौन? साक्षी कः? द्रष्टा कः… ज्ञाता कः… साक्षी कः… मैं? या तुम? अगर देखने वाले तुम… और दिखने वाला जग भी तुम… तो बीच में… मैं कहाँ? कोऽहम्… कोऽहम्… मैं कौन? मेरा मन? नेति… नेति… मेरी देह? नेति… नेति… मेरा नाम? नेति… नेति… तो मैं कौन? कोऽहम्… कोऽहम्… हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… ध्यान… पूजा… पुण्य… पुरुषार्थ… इन सबके लिए… अपने ही मन में… मैंने तुमको बनाया… नाम दिया… रूप दिया… अपने भाव में… तुमको बसाया… पर जिस मन में मैंने तुमको बनाया… वह मन… किसने बनाया? कः कर्ता? कः स्रष्टा? कर्ता कः… स्रष्टा कः… मैंने तुमको बनाया? या तुमने मुझको? मैंने तुमको पाया? या तुमने मुझको? यदि मैंने तुमको बनाया — तुम शिवम्! अगर तुमने मुझको बनाया — मैं शून्यम्! अगर मैंने तुमको पाया — अहं ब्रह्मास्मि! अगर तुमने मुझको पाया — मुझे पाया? या… खोया? कः प्राप्तः? कः नष्टः? कौन मिला? कौन खोया? हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… मुझ में तुम… मुझ में तुम… फिर मैं… मैं कैसा? मैं मिटा? या भेद मिटा? नेति… नेति… कोऽहम्… सोऽहम्… शान्तम्… शून्यम्… अनन्तम्… सत्यम्… शिवम्… हे महादेव… चिदम्बर… चिदम्बर… जटाधर… योगेश्वर… कालेश्वर… चिदम्बर… चिदम्बर… चिदम्बर… चिदम्बर… ------------------------------------------------- ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव। #Mahadev #Chidambar #MujhMeinTum #ShivaSong #HarHarMahadev #OmNamahShivaya #ShivBhajan #Advaita #Koham #Soham #ShunyamSatyamShivam #SpiritualMusic #HindiDevotional #RUDRUNMATTA