काहे बिसरवले हरि जी नेहिया लगाके | वासुदेव देवकी के ललना | कृष्ण विरह भजन | मगही लोकगीत
Aruhi Ke Lok Geet
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काहे बिसरवले हरि जी नेहिया लगाके | वासुदेव देवकी के ललना | कृष्ण विरह भजन | मगही लोकगीत
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🙏💙 काहे बिसरवले हरि जी नेहिया लगाके, वासुदेव देवकी के ललना… — श्रीकृष्ण के प्रेम और विरह भाव से जुड़ा एक सुंदर एवं भावपूर्ण लोक-भजन। 🎶🦚
इस भजन में श्रीकृष्ण से प्रेम करने के बाद उनके विरह में व्याकुल मन की भावनाओं को व्यक्त किया गया है। गोकुल-वृंदावन से कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद पीछे छूटे भक्तों और गोपियों के मन में बसे प्रेम और विरह की अनुभूति इस गीत में दिखाई देती है। 🌿🙏
🎵 गीत: काहे बिसरवले हरि जी नेहिया लगाके
🦚 प्रसंग: श्रीकृष्ण का विरह
🙏 भाव: प्रेम, भक्ति और विरह
🌾 अंदाज़: मगही (मगधी) लोक-भजन
🎶 श्रेणी: कृष्ण भजन | कृष्ण लोकगीत | मगही लोकगीत
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🌾 हमर माटी | हमर बोली | हमर लोकगीत 🎶
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