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श्री शिव महापुराण विधेश्वरसहिंता अध्याय 7 | Full Shiv Puran Hindi Shiv Puran Katha By Riteshvurkude

Ritesh V Urkude - Puran katha

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श्री शिव महापुराण विधेश्वरसहिंता अध्याय 7 | Full Shiv Puran Hindi Shiv Puran Katha By Riteshvurkude

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Ritesh V Urkude - Puran katha
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श्री शिव महापुराण विधेश्वरसहिंता अध्याय 7 | Full Shiv Puran Hindi - Shiv Puran Katha #Riteshvurkude स्थापना, उसके लक्षण और पूजन की विधिका वर्णन तथा शिवपद की प्राप्ति कराने वाले सत्कर्मों का विवेचन किया गया है. ​ऋषियों का प्रश्न: ऋषियों ने सूतजी से पूछा कि लक्षणों से युक्त शालिङ्गकी पीठसहित स्थापना कैसे करनी चाहिए? शालिङ्गका पीठ मण्डलाकार (गोल), चौकोर, त्रिकोण आदि लक्षणों से युक्त कैसा होना चाहिए तथा उसकी पूजा कैसे करनी चाहिए? किस देश-काल में करनी चाहिए अथवा खाटके पायेकी भाँति ऊपर-नीचे कैसा होना चाहिए और किस द्रव्य के द्वारा उसका निर्माण होना चाहिए? ​सूतजी का उत्तर: सूतजी ने कहा—महर्षियों! मैं तुम लोगों के लिए महान फल देने वाले लिंगपीठ के निर्माण और उसके लक्षणों के विषय में बताता हूँ. ​ ​#ShivlingSthapana #ShivPujan #HinduScriptures #ShivaWorship #SanatanDharma #SpiritualKnowledge #PuranikKatha #DevotionalReading शिव पुराण की प्रमुख संहिताएं (खंड) विद्येश्वर संहिता: इसमें शिव महिमा, पार्थिव पूजन और ॐ नमः शिवाय मंत्र का महत्व बताया गया है। रुद्र संहिता: इसमें शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म और शिव लीलाओं का वर्णन है। शतरुद्र संहिता: भगवान शिव के विभिन्न अवतारों और उनके रहस्यों का वर्णन है। कोटि रुद्र संहिता: द्वादश ज्योतिर्लिंगों (12 ज्योतिर्लिंग) की कथा और उनके महात्म्य का विवरण है। उमा संहिता: माता उमा (पार्वती) के चरित्र, तपस्या और ज्ञान का वर्णन है। कैलाश संहिता: ध्यान, योग, मोक्ष मार्ग और शिव प्राप्ति के साधनों का वर्णन है। वायवीय संहिता: ज्ञान, योग, ईशान कल्प और शिव भक्ति की महिमा का विस्तृत विवेचन है। मुख्य कथाएं और प्रसंग सृष्टि की उत्पत्ति: भगवान सदाशिव ने अपनी शक्ति (उमा/माता जगदंबा) के साथ मिलकर ब्रह्मा और विष्णु को प्रकट किया तथा उन्हें सृष्टि की रचना व पालन का कार्य सौंपा। सती और शिव कथा: दक्ष प्रजापति के यहाँ माता सती का जन्म, शिव जी से उनका विवाह, दक्ष के यज्ञ में सती का योगाग्नि द्वारा देहत्याग और वीरभद्र द्वारा दक्ष का विध्वंस। पार्वती विवाह: माता सती का हिमालय के यहाँ पार्वती के रूप में पुनर्जन्म, शिव जी को पाने के लिए कठोर तपस्या और शिव-पार्वती का विवाह। कार्तिकेय और गणेश जन्म: कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध तथा श्री गणेश के जन्म और उनके गजानन स्वरूप की कथा। शिव महिमा व त्रिपुरा वध: असुरों के राजा जालंधर, त्रिपुरासुर और अंधकासुर का वध कर देवताओं को संकट से मुक्त करना। YouTube·Maha Sanatan Dharm Thank you so much for watching videos 🙏🙏 कॉपीराइट अस्वीकरण: - कॉपीराइट अधिनियम 1976 की धारा 107 के तहत, आलोचना, टिप्पणी, समाचार रिपोर्टिंग, शिक्षण, छात्रवृत्ति और अनुसंधान जैसे उद्देश्यों के लिए उचित उपयोग की अनुमति दी गई है। उचित उपयोग कॉपीराइट कानूनों द्वारा अनुमत एक ऐसा उपयोग है जो अन्यथा उल्लंघनकारी हो सकता है। गैर-लाभकारी, शैक्षिक या व्यक्तिगत उपयोग उचित उपयोग के पक्ष में संतुलन बनाता है