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GORAKH CHALISA / गोरख चालीसा -nathbhkat parivar maharashtra

Nathbhakt Parivar Maharashtra

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गणपति गिरजा पुत्र को । सुमिरूँ बारम्बार । हाथ जोड़ बिनती करूँ । शारद नाम आधार ॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय गोरख नाथ अविनासी । कृपा करो गुरु देव प्रकाशी ॥१॥ जय जय जय गोरख गुण ज्ञानी । इच्छा रुप योगी वरदानी ॥२॥ अलख निरंजन तुम्हरो नामा । सदा करो भक्तन हित कामा ॥३॥ नाम तुम्हारा जो कोई गावे । जन्म जन्म के दुःख मिट जावे ॥४॥ जो कोई गोरख नाम सुनावे । भूत पिसाच निकट नहीं आवे ॥५॥ ज्ञान तुम्हारा योग से पावे । रुप तुम्हारा लख्या न जावे ॥६॥ निराकर तुम हो निर्वाणी । महिमा तुम्हारी वेद न जानी ॥७॥ घट घट के तुम अन्तर्यामी । सिद्ध चौरासी करे प्रणामी ॥८॥ भस्म अंग गल नाद विराजे । जटा शीश अति सुन्दर साजे ॥९॥ तुम बिन देव और नहीं दूजा । देव मुनि जन करते पूजा ॥१०॥ चिदानन्द सन्तन हितकारी । मंगल करुण अमंगल हारी ॥११॥ पूर्ण ब्रह्म सकल घट वासी । गोरख नाथ सकल प्रकाशी ॥१२॥ गोरख गोरख जो कोई ध्यावे । ब्रह्म रुप के दर्शन पावे ॥१३॥ शंकर रुप धर डमरु बाजे । कानन कुण्डल सुन्दर साजे ॥१४॥ नित्यानन्द है नाम तुम्हारा । असुर मार भक्तन रखवारा ॥१५॥ अति विशाल है रुप तुम्हारा । सुर नर मुनि पावै न पारा ॥१६॥ दीन बन्धु दीनन हितकारी । हरो पाप हम शरण तुम्हारी ॥१७॥ योग युक्ति में हो प्रकाशा । सदा करो संतन तन वासा ॥१८॥ प्रातःकाल ले नाम तुम्हारा । सिद्धि बढ़ै अरु योग प्रचारा ॥१९॥ हठ हठ हठ गोरक्ष हठीले । मार मार वैरी के कीले ॥२०॥ चल चल चल गोरख विकराला । दुश्मन मार करो बेहाला ॥२१॥ जय जय जय गोरख अविनासी । अपने जन की हरो चौरासी॥२२॥ अचल अगम है गोरख योगी । सिद्धि देवो हरो रस भोगी ॥२३॥ काटो मार्ग यम को तुम आई । तुम बिन मेरा कौन सहाई ॥२४॥ अजर-अमर है तुम्हारी देहा । सनकादिक सब जोरहिं नेहा ॥२५॥ कोटिन रवि सम तेज तुम्हारा । है प्रसिद्ध जगत उजियारा ॥२६॥ योगी लखे तुम्हारी माया । पार ब्रह्मा से ध्यान लगाया ॥२७॥ ध्यान तुम्हारा जो कोई लावे । अष्टसिद्धि नव निधि घर पावे ॥२८॥ शिव गोरख है नाम तुम्हारा । पापी दुष्ट अधम को तारा ॥२९॥ अगम अगोचर निर्भय नाथा । सदा रहो सन्तन के साथा ॥३०॥ शंकर रूप अवतार तुम्हारा । गोपीचन्द्र भरथरी को तारा ॥३१॥ सुन लीजो प्रभु अरज हमारी । कृपासिन्धु योगी ब्रह्मचारी ॥३२॥ पूर्ण आस दास की कीजे । सेवक जान ज्ञान को दीजे ॥३३॥ पतित पावन अधम अधारा । तिनके हेतु तुम लेत अवतारा ॥३४॥ अलख निरंजन नाम तुम्हारा । अगम पन्थ जिन योग प्रचारा ॥३५॥ जय जय जय गोरख भगवाना । सदा करो भक्तन कल्याना ॥३६॥ जय जय जय गोरख अविनासी । सेवा करै सिद्ध चौरासी ॥३७॥ जो ये पढ़हि गोरख चालीसा । होय सिद्ध साक्षी जगदीशा ॥३८॥ हाथ जोड़कर ध्यान लगावे । और श्रद्धा से भेंट चढ़ावे ॥३९॥ बारह पाठ पढ़ै नित जोई । मनोकामना पूर्ण होइ ॥४०॥ ॥ दोहा ॥ सुने सुनावे प्रेम वश । पूजे अपने हाथ । मन इच्छा सब कामना । पूरे गोरखनाथ ॥ अगम अगोचर नाथ तुम । पारब्रह्म अवतार । कानन कुण्डल सिर जटा । अंग विभूति अपार ॥ सिद्ध पुरुष योगेश्वरो । दो मुझको उपदेश । हर समय सेवा करुँ । सुबह शाम आदेश ॥ #trending #kanifnath #GORAKHNATH #nathbhkatparivarmaharashtra