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कंडाली के रेशों से लाखों की कमाई कर रहे देहरादून के गुलज़ार | Report

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कंडाली के रेशों से लाखों की कमाई कर रहे देहरादून के गुलज़ार | Report

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जिस पौधे को छूने भर से हाथों में जलन और खुजली होने लगती है, क्या उसी पौधे से कपड़ा भी बनाया जा सकता है? उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मिलने वाली डास कंडाली यानी हिमालयन जायंट नेटल के तने से प्राकृतिक रेशा निकाला जाता है। इसी रेशे से धागा और फिर कपड़ा तैयार किया जा सकता है। देहरादून के सहसपुर ब्लॉक के शंकरपुर गाँव में रहने वाले गुलज़ार अहमद अपने परिवार के साथ चार पीढ़ियों से हैंडलूम के काम से जुड़े हैं। ऊन, सिल्क, पश्मीना और दूसरे प्राकृतिक रेशों से कपड़े बनाने वाले गुलज़ार ने अब डास कंडाली के रेशे से कपड़ा बनाने का नया प्रयोग शुरू किया है। कैसे कंडाली का यह पारंपरिक रेशा कपड़े में बदलता है और इसे नए बाजार तक पहुँचाने की क्या संभावनाएँ हैं, देखिए इस डॉक्यूमेंट्री में For Commercials/ Advertising/ Brand Promotion at Baramasa: Contact : 9720128918, Whatsapp: 7505566409 Join this channel to support baramasa:    / @baramasa   बारामासा को फ़ॉलो करें: Facebook:   / baramasa.in   Instagram:   / baramasa.in   Twitter:   / baramasa_in