Перейти к содержимому

श्रीराम के महाप्रस्थान के साथ जन समुदाय ने संतानक लोक के लिए किया प्रस्थान | रामायण उद्धार कथा

Ramayan

0:00 / 0:00

श्रीराम के महाप्रस्थान के साथ जन समुदाय ने संतानक लोक के लिए किया प्रस्थान | रामायण उद्धार कथा

31 224 просмотра · 6 дней назад
Ramayan
5,25 млн подписчиков
31 224 просмотра · 6 дней назад
लक्ष्मण का परित्याग करने के बाद एक दिन श्रीराम गुरुदेव वशिष्ठ के आश्रम जाकर उनसे महा प्रस्थान करने की आज्ञा माँगते है। महर्षि उन्हें आज्ञा प्रदान करते हुए कहते है कि हे त्रिलोकीनाथ आप समस्त विश्व में और समस्त विश्व आप ही में स्थित है। आप ना तो कहीं आते हैं ना कहीं जाते हैं। यह आगमन और प्रस्थान तो केवल मायापति की एक लीला है। अयोध्यावासी भी श्रीराम के पीछा करते हुए आश्रम पहुँच जाते है और उनसे विनती करने लगते है कि हे राम हमें त्याग कर मत जाइए, हमें भी अपने साथ ही ले चलिए। यदि आप हमें साथ लिए बिना चले जाएंगे तो हम यह समझेंगे कि आपने यम दण्ड उठाकर हमारी हत्या कर दी है। उनकी यह विनती सुनकर महर्षि वशिष्ठ कहते है कि हे राम ये आपके अनन्य भक्त हैं देवताओं के पुत्र, गंधर्व, किन्नर, सिद्ध और तेजस्वी नागों की संतान है। जो मानव, वानर और ऋक्ष का रूप धारण करके धरती पर आपके लीला काल में आपकी सेवा करने आए हैं। अतः अब इन्हें भी अपने साथ जाने की आज्ञा दें। महर्षि की आज्ञा का पालन करते हुए श्रीराम सभी को अपने साथ लेकर अपने निजधाम की ओर चल देते है। अपने भाइयों और भक्तों सहित श्रीराम को महा प्रस्थान के लिए सरयू नदी के तट पर आता देख उनके स्वागत के लिए आकाश से समस्त देवी-देवताओं सहित भगवान शिव और ब्रह्मा जी उपस्थित हो जाते थे। जैसे ही श्री राम ने सरयू नदी में प्रवेश किया तो ब्रह्मा जी ने आकाश में प्रकट होकर उनसे चतुर्भुज विष्णु रूप में प्रवेश करने का अनुरोध करते है। उनके अनुरोध का सम्मान करते हुए श्रीराम भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में आ जाते है। उनके इस स्वरूप को देख देवता गण आकाश से पुष्प की वर्षा करते है और श्रीराम के साथ आए उनके भाई, मित्र और भक्त भी उस स्वरूप का हाथ जोड़कर नमन करते है। श्रीराम गोलोक से आए विशेष विमान पर सवार हो जाते है। भरत और शत्रुघ्न श्रीराम के विष्णु स्वरूप में समा जाते है। विष्णु स्वरूप श्रीराम विभीषण को धरती पर रहकर भगवान जगन्नाथ की आराधना करने तथा हनुमान जी को कलयुग के अंत तक धरती पर राम कथा का प्रचार करने और रीक्षराज जामवंत को द्वापर के अंत तक धरती पर रहने की आज्ञा देते है। अंत में श्रीराम के अनुरोध पर ब्रह्मा जी श्रीराम के साथ आए हुए जन समुदाय को सरयू में देह त्याग कर संतानक नाम के लोक में जाने की अनुमति प्रदान कर देते है। विष्णु स्वरूप श्रीराम सभी को अपना आशीष देकर महा प्रस्थान कर जाते है। इस सुअवसर सभी देवी-देवता श्रीराम के विष्णु स्वरूप की वंदना करते है और उसके पश्चात श्रीराम के साथ आए अयोध्यावासी एक-एक करके सरयू में समाकर संतानक लोक के लिए प्रस्थान कर जाते है। जय सिया राम! वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #shreeram#ramayan #katha #uddharkatha #ramayanuddharkatha