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Soch Man! Shyam Milan Ki Baat -Part 1/6 || सोच मन! श्याम मिलन की बात -भाग 1/6

Radha Govind Mandir, Chandigarh

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Soch Man! Shyam Milan Ki Baat -Part 1/6 || सोच मन! श्याम मिलन की बात -भाग 1/6

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Radha Govind Mandir, Chandigarh
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💠 मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य क्या है एवं वह कैसे प्राप्त होगा? आध्यात्मिक जगत में इस विषय में अनेक मत प्रचलित हैं। संसार में अधिकांशतः भोले लोग संसार के भौतिक सुखों को ही अपना लक्ष्य बनाये हुये हैं। इने-गिने लोग ही आप्त ग्रंथों में विश्वास रखते हैं किन्तु वे भी विभिन्न दर्शन शास्त्रों के आधार पर दुःख निवृत्ति अथवा मोक्ष को जीवन का अंतिम ध्येय समझते हैं। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज अपनी 'जगद्गुरूत्तम' एवं 'निखिलदर्शनसमन्वयाचार्य' की उपाधियों को चरितार्थ करते हुये समस्त प्रचलित आध्यात्मिक मतों का अति सुन्दर समन्वय करते हैं तथा वेदों द्वारा प्रमाणित अपने 'प्रेम रस सिद्धांत' के आधार पर भुक्ति एवं मुक्ति दोनों ही को निकृष्ट बताकर श्रीराधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की प्राप्ति को ही जीव मात्र का अंतिम लक्ष्य उद्घोषित करते हैं। उन्होंने साधना के लिये परम उपयोगी तत्त्व ज्ञान के निर्देशन हेतु मानव देह का महत्त्व, जीव का सर्वोच्च लक्ष्य, वास्तविक आनन्द का स्वरूप, धर्म-कर्म का वास्तविक स्वरूप, जीव मात्र का अंतिम धर्म, भक्ति मार्ग की महिमा, भक्ति के बाधक तत्त्व, उपासना का व्यावहारिक स्वरूप इत्यादि अनेक महत्वपूर्ण विषयों को स्पष्ट करने हेतु अपने एक स्वरचित पद 'सोच मन! श्याम मिलन की बात' की व्याख्या करते हुये कुछ अति महत्वपूर्ण प्रवचन दिये हैं। इस प्रवचन श्रृंखला में अनेक तात्विक विषयों को अत्यंत सरल एवं स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जो अन्यत्र दुर्लभ है। भक्ति मार्ग की अनेक भ्रान्तियों को मिटाने वाली एवं आध्यात्मिक जगत के अनूठे रहस्यों को उद्घाटित करने वाली यह विशेष प्रवचन श्रृंखला अवश्यमेव श्रवणीय है। ये व्याख्यान सन् 1980 से पूर्व काल के हैं तथा इनकी वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है, केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग ही प्राप्त है। श्रोताओं के विशेष लाभ के दृष्टिगत हम उसी दुर्लभ ऑडियो को यहाँ वीडियो के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। सभी से अनुरोध है कि आप इस परम लाभदायक विषय का एकाग्रचित्त होकर श्रवण करें एवं अधिकाधिक लाभ प्राप्त करें।💠 इस वीडियो के कुछ अंश हैं— एक तत्त्ववेत्ता अपने मन से कहता है, " अरे मन! श्याम मिलन की बात सोच।" विश्व का प्रत्येक जीव अनादिकाल से प्रतिक्षण कुछ न कुछ करता चला आया है। यह उसका नेचर है। और किसी भी कर्म के करने के पूर्व सोचना कमपल्सरी है। बिना सोचे कोई वर्क नहीं हो सकता। और सोचने में भी पहले एम आता है, उद्देश्य आता है। किसलिए? कारण क्या? हम कोई काम करें क्यों? फिर अवांतर अनेक प्रश्न आते हैं उनका समाधान होता है ये सब सोचना कहलाता है। तब कोई कर्म प्रारंभ किया जाता है। पहले सोचना फिर उसके बाद कर्म। बीच में बहुत से और भी क्लासेज है। हम मोटी-मोटी बात बता रहे है। वैसे, जैसे किसी को घड़ा बनाना है तो बहुत सी अपेक्षित वस्तुएं चाहिए। जैसे घड़ा बनाने वाला, घड़ा बनाने का सामान, घड़ा बनाने का ज्ञान, फिर घड़ा बनाने की इच्छा, फिर घड़ा बनाने का संकल्प, फिर घड़ा बनाने की चेष्टा, फिर घड़ा बनाने की क्रिया, फिर घड़ा बना। इतनी चीजें इकट्ठी हो तो एक मिट्टी का घड़ा बनता है। इसी प्रकार हम जितने भी कर्म करते हैं उन सबमें इतने मैटर चाहिए। कोई कर्म क्यों करें? फिर उस कर्म करने का साधन है क्या हमारे पास? फिर उस कर्म का ज्ञान है क्या? फिर उसकी इच्छा हुई क्या? फिर उसका संकल्प किया क्या? फिर उसकी चेष्टा भी की क्या? उसके बाद क्रिया भी की क्या? तब फिर वो कर्म सामने आता है। फल उसका ' सु ' हो अथवा ' कु ' हो। अच्छा हो या बुरा हो। तो किसी भी कर्म के पहले प्लानिंग होती है। —जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज Full playlist link :-    • सोच मन! श्याम मिलन की बात | Soch Man! Shya...   © Jagadguru Kripalu Parishat. All rights reserved. All rights belong to Jagadguru Kripalu Parishat. 🔸Arey Man! Ubhaya Roop Jaga Jaan | अरे मन! उभय रूप जग जान -    • अरे मन! उभय रूप जग जान | Arey Man! Ubhaya ...   🔸Mahapurush Tattwa | महापुरुष तत्व -    • महापुरुष तत्व | Mahapurush Tattwa   🔸Sakhi Yah! Kaiso Hai Braj Dham | सखी यह! कैसो है ब्रज धाम -    • सखी यह! कैसो है ब्रज धाम | Sakhi Yah! Kais...   🔸Tajo Re Man! Chhanbhangur Vairag | तजो रे मन! छनभंगुर वैराग -    • तजो रे मन! छनभंगुर वैराग | Tajo Re Man! Ch...   🔸Radha Govind Geet | राधा गोविंद गीत -    • राधा गोविंद गीत | Radha Govind Geet   🟪Facebook:   / shyamashyamsamiti   🟧Instagram:   / sushreeakhileshwarididi   🟦Twitter:   / sss_zirakpur   ⬜Telegram: https://t.me/sss_zirakpur 💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮 कलियुग में दान को ही कल्याण का एकमात्र माध्यम बताया गया है। 'दानमेकं कलौयुगे'। दान पात्र के अनुसार ही अपना फल देता है तथा भगवान एवं महापुरुष के निमित्त किया गया दान सर्वोत्कृष्ट फल प्रदान करता है। हम साधारण जीव यथार्थ में यह नहीं जान सकते कि वास्तविक महापुरुष के प्रति किया गया हमारा दान/समर्पण हमारे कल्याण का कैसा अद्भुत द्वार खोल देगा। अतएव, समर्पण हेतु आगे बढिये। आपकी यह दान राशी जीरकपुर (चंडीगढ़) स्थित राधा गोविंद मन्दिर के निर्माण कार्य में प्रयुक्त होगी। ऑनलाइन अनुदान भेजने के लिए कृपया निम्न लिंक पर जायें https://rzp.io/l/Lo4K8pf (केवल भारतीय नागरिकों के लिए) Donate using your ATM Card/Debit Card/Credit Card/Net Banking/UPI/QR code at https://rzp.io/l/Lo4K8pf (Only for Indian Citizens) Shyama Shyam Samiti Contact numbers : 8552066661, 9872396855, 9988998001 💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮 #जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज #jagadguru_shri_kripalu_ji_maharaj #jagadguru_kripalu #AkhileshwariDidi