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नक्सलियों ने सोते हुए मासूम आदिवासियों को जिंदा जलाया | Salwa Judum Era Errabore Massacre 2006

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नक्सलियों ने सोते हुए मासूम आदिवासियों को जिंदा जलाया | Salwa Judum Era Errabore Massacre 2006

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करीब दो दशक पहले बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ खड़े हुए आदिवासियों के आंदोलन 'सलवा जुड़ूम' के दौर में कई खौफनाक घटनाएं हुईं. लेकिन वर्ष 2006 में सुकमा जिले के एर्राबोर (Errabore) राहत शिविर पर हुआ नक्सली हमला माओवादी बर्बरता का सबसे बीभत्स उदाहरण है. यह हमला किसी सशस्त्र सेना पर नहीं, बल्कि अपनी जान बचाकर रह रहे निहत्थे ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों के अस्थायी ताड़-पत्तियों के झोपड़ियों पर किया गया था. नक्सलियों ने पूरे कैंप को घेरकर मार-काट मचाई और झोपड़ियों में आग लगा दी, जिसमें 50 से अधिक बेगुनाह आदिवासियों की जान चली गई. OpIndia की विशेष शृंखला 'Naxal Files' के तहत पत्रकार Ritika Chandola लेकर आई हैं बस्तर के इसी खूनी इतिहास की जमीनी सच्चाई. देखिए एर्राबोर नरसंहार की पूरी कहानी. In this edition of Naxal Files, Ritika Chandola revisits the site of the tragedy to uncover the truth behind Maoist terror and the forgotten victims of Errabore. आधी रात को चीखें और चारों तरफ आग... जुलाई 2006 में एर्राबोर राहत शिविर एक श्मशान में बदल गया था। नक्सलियों ने निहत्थे ग्रामीणों को घेरकर उनकी झोपड़ियों को जिंदा जला दिया। इस बर्बर हमले में 50 से अधिक निर्दोष आदिवासियों की जान चली गई। दो दशक बाद, हम उस खूनी इतिहास की जमीनी सच्चाई को खंगाल रहे हैं। देखिए 'Naxal Files' की यह विशेष रिपोर्ट। #NaxalFiles #Bastar #ErraboreMassacre #Chhattisgarh Category: ग्राउंड रिपोर्ट सहयोग हेतु यहाँ जाएँ: https://www.opindia.com/support/ ---------------------------------------------------------------------------------------------------- Connect with us: Twitter:   / opindia_com     / opindia_in   (Hindi) Facebook:   / opindiacom     / opindia.in   (Hindi) Email: info@opindia.com