नकली गुरु कैसे बिगाड़ते हैं आपकी सेहत और आत्मा || Shri Mataji Speech
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नकली गुरु कैसे बिगाड़ते हैं आपकी सेहत और आत्मा || Shri Mataji Speech
आज हम गुरु चक्र या गुरु तत्व की बात करेंगे, जिसे भावसागर में स्थित माना जाता है। जब यह तत्व अशुद्ध हो जाता है, तो व्यक्ति को अनेक समस्याएं घेर लेती हैं। सबसे बड़ी गलती होती है, किसी गलत गुरु के सामने सिर झुकाना। श्रद्धा के नाम पर लोग ऐसे व्यक्तियों को गुरु बना लेते हैं जिनका ना चरित्र शुद्ध है, ना विचार। ऐसे ढोंगी गुरुओं का उद्देश्य केवल धन, प्रसिद्धि या सत्ता प्राप्त करना होता है, और उनके अनुयायी अक्सर मानसिक व शारीरिक कष्टों में डूबे होते हैं।
श्री माताजी इस भ्रमित परंपरा को चुनौती देती हैं—उनका कहना है कि कोई भी सच्चा गुरु बिना स्वार्थ के कार्य करता है। गलत गुरुओं के कारण लोग अनेक बीमारियों, विशेषकर कैंसर, का शिकार हो जाते हैं। माताजी स्पष्ट करती हैं कि जिन व्यक्तियों का गुरु तत्व अशुद्ध होता है, उनमें से 80% लोग जिनका उन्होंने इलाज किया, किसी न किसी रूप में तांत्रिक, भूत-प्रेत साधना या नकली गुरुओं के संपर्क में रहे हैं।
गुरु तत्व का दोष विशेष रूप से एक चक्र को प्रभावित करता है जिसे "एकादश रुद्र" कहा जाता है। जब यह चक्र टूटता है, तो वह हमारे शरीर के नियंत्रण से बाहर होकर स्वतः क्रियाशील हो जाता है, जिससे रोग उत्पन्न होता है—विशेषकर कैंसर। इसकी वजह यह है कि जब हम सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम का अत्यधिक उपयोग करते हैं, तो नियंत्रण प्रणाली कमजोर पड़ जाती है।
इसके अलावा, मंत्रों का बिना समझ के उच्चारण, बिना आत्मसाक्षात्कार के देवताओं के नाम जपना, और गुरु महिमा गाना—ये सब उल्टा प्रभाव डाल सकते हैं। शिव का मंत्र जपते हुए यदि आपका उनसे संबंध नहीं है, तो रुढ़ा चक्र पकड़ेगा और आपको हृदय रोग हो सकता है। इसी तरह, हनुमान चालीसा पढ़ने से यदि संबंध न हो तो राइट हार्ट पकड़ सकता है, जिससे अस्थमा हो सकता है।
माताजी लोगों को जागरूक करती हैं कि सिर्फ श्रद्धा नहीं, विवेक और आत्मसाक्षात्कार जरूरी है। बिना अंदरूनी कनेक्शन के पूजा-पाठ या गुरु भक्ति से केवल नुकसान ही होता है। सही गुरु वह है जो निःस्वार्थ रूप से आपका आत्मबोध कराए, और आपके अंदर सच्चा परिवर्तन लाए।
Reference : 1989 - 0314 ( Part 3 ) Divine Sahajyog
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