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Shri Yamunaji 41 Pad 5-8 , શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ 5-8, श्री यमुनाजी के ४१ पद 5-8,

SUR SAGAR

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Shri Yamunaji 41 Pad 5-8 , શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ 5-8, श्री यमुनाजी के ४१ पद 5-8,

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Shri Yamunaji 41 Pad 5-8, - શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ, - पुष्टिमार्ग कीर्तन,Haveli Sangeet, Kirtans, Bhajans, Shotras, Mantras, Pushtimarg Kirtan, Ashtachap, Bhagwati Prasad Ghandarva, Pushtimarg, Pushtimargiye Sangeet, SUR SAGAR, KIRTANKAR: Pt. BHAGWATI PRASAD Kirtans by: Bhagwati Prasad 00:00 पद 5 - श्याम संग श्याम व्हे रही श्रीयमुने 05:57 पद 6 - श्री यमुनासी नाहीं कोऊ और दाता 11:48 पद 7 - श्री यमुना जस जगतमें जोई गावे 16:45 पद 8 - चरण पंकज रेणु श्री यमुनेजु देनी पद संख्या 5 स्याम संग स्याम , वे रही श्री यमुने, सूरत श्रम बिंदुते, सिन्धु सी बही चली; मानो आतुर अली ,रही न भवने, कोटि कामही वारो ,रुप नैनन निहारो लाल गिरिधरन, संग करत रमने, हरखि 'गोविंद'प्रभु निरखी इनकि ओर, मानो नव दुल्हनी आई गोने. पद संख्या 6 श्री यमुनासी नाही कोई और दाता, जो इनकी शरण जात है दोरके; ताहिको तिहि छिनु कर सनाथा. येहि गुणगान रसखान रसना एक, सहस्त्र रसना क्यों न दई विधाता; 'गोविंद'प्रभु तन, मन , धन वारने, सबहीको जीवन इनही के जु हाथा. पद संख्या 7 श्री यमुना जस जगत मे जोई गावे, ताके आधिन व्हे रहत है प्राणपति; नेन अरु बेनमे रस जु छावे. वेद पुराण ते बात यह अगम है, प्रेम को भेद कोउ न पावे; कहत 'गोविंद'श्री यमुने कि जा पर कृपा सोई श्रीवल्लभ कुल शरण आवे. पद संख्या 8 चरण पंकज रेणु श्री यमुने जु देनी, कलियुग जीव उधारन कारन; काटत पाप अब धार पेनी. प्राणपति प्राण-सुत, आये भक्तन हित, सकल सुख कि तुम हो जु श्रेनी; 'गोविंद'प्रभु बिना रहत नही एक छिनु, अति ही आतुर चंचल जु नैनी. .