शरद पूर्णिमा का परिचय, महत्व और उपाय
Atharvaveda -- अथर्ववेद
0:00 / 0:00
शरद पूर्णिमा का परिचय, महत्व और उपाय
91 просмотр · 9 дн. назад
Atharvaveda -- अथर्ववेद
586 подписчиков
91 просмотр · 9 дн. назад
शरद पूर्णिमा (जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है) हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।
शरद पूर्णिमा का महत्व
• मां लक्ष्मी का प्राकट्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा के दिन ही माता लक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ था।
• कोजागरी व्रत: इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है। 'कोजागर' का अर्थ है "कौन जाग रहा है?"। जो इस रात जागकर भजन-कीर्तन करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।
• अमृत वर्षा और खीर का महत्व: इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। गाय के दूध और चावल की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखी जाती है, जिससे उसमें औषधीय गुण समाहित हो जाते हैं। इसे अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
• श्रीकृष्ण का महारास: इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ यमुना तट पर महारास रचाया था।
शरद पूर्णिमा की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की दो पुत्रियां थीं। दोनों बेटियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन बड़ी पुत्री विधिपूर्वक पूरा व्रत करती थी, जबकि छोटी पुत्री व्रत बीच में ही अधूरा छोड़ देती थी।
परिणामस्वरूप, छोटी पुत्री की जो भी संतान होती, वह जन्म लेते ही मर जाती थी। एक बार जब उसकी संतान हुई, तो बड़ी बहन ने अपने पूर्ण व्रत का पुण्य उसका स्पर्श करके उस नवजात शिशु को दे दिया, जिससे वह जीवित हो उठी। इसी घटना के बाद से कोजागर व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया और लोग विधि-विधान से यह व्रत करने लगे।
शरद पूर्णिमा के उपाय
• धन प्राप्ति और तंगी दूर करने के लिए: शरद पूर्णिमा की रात एक लाल पोटली में हल्दी, चावल, केसर, लौंग, तेजपत्ता, हरी धनिया और 5 सिक्के बांधकर माता लक्ष्मी के चरणों में रखें और बाद में उसे अपने घर की तिजोरी (लॉकर) में रख दें।
• मंत्र जाप: इस रात तुलसी की माला से 'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः' का 108 बार और कमलगट्टे की माला से 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करें।
• चंद्र देव को अर्घ्य: चंद्रोदय के समय कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें और 'ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:' मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक तनाव और चंद्र दोष दूर होता है।