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न भूमि न जल न अग्नि न वायु - मूर्तिहीन त्रिमूर्ति की स्तुति करता हूँ

moti singh Rathore

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न भूमि न जल न अग्नि न वायु - मूर्तिहीन त्रिमूर्ति की स्तुति करता हूँ

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moti singh Rathore
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न भूमिर्न चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा। न ग्रीष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्ति‍स्त्रिमूर्ति‍ तमीडे ॥ ६ ॥ जो न पृथ्वी हैं, न जल हैं, न अग्नि हैं, न वायु हैं और न आकाश हैं; न तन्द्रा हैं, न निद्रा हैं, न ग्रीष्म हैं और न शीत हैं तथा जिनका न कोई देश है, न वेष है, उन मूर्तिहीन त्रिमूर्ति की मैं स्तुति करता हूँ॥ भाव: पंचमहाभूतों से परे, निद्रा-तन्द्रा, सर्दी-गर्मी, देश-वेष से अतीत, मूर्तिहीन होते हुए भी ब्रह्मा-विष्णु-महेश के रूप में साकार - वही परब्रह्म त्रिमूर्ति। #Shloka6 #Trimurti #BrahmaVishnuMahesh #Sanatan #bhakti #rathorebhinchari #jaishriram