परात्मा एक जगत बीज आद्य निराकार ओंकार वेद्य | जहाँ विश्व लय होता है उन ईश को भजता हूँ
moti singh Rathore
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परात्मा एक जगत बीज आद्य निराकार ओंकार वेद्य | जहाँ विश्व लय होता है उन ईश को भजता हूँ
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परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं
निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
यतो जायते पाल्यते येन विश्वं
तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्॥ ५ ॥
जो परमात्मा हैं, एक हैं, जगत् के आदिकरण हैं, इच्छारहित हैं, निराकार हैं और प्रणव (ओंकार) द्वारा जानने योग्य हैं तथा जिनसे सम्पूर्ण विश्व की उत्पत्ति और पालन होता है और फिर जिनमें उसका लय हो जाता है, उन प्रभु को मैं भजता हूँ॥ ५ ॥
भावार्थ:
परात्मानमेकं: वे परमात्मा एक हैं - अद्वितीय
जगद्बीजमाद्यं: सारे जगत के बीज और आदि कारण
निरीहं निराकारं: इच्छा रहित, निराकार
ओंकारवेद्यम्: ॐ द्वारा ही जाने जाते हैं - प्रणव ही उनका नाम, रूप, वेद
यतो जायते पाल्यते येन: जिनसे विश्व उत्पन्न होता है, जिनसे पाला जाता है
लीयते यत्र विश्वम्: अंत में जिनमें लीन हो जाता है - सृष्टि, स्थिति, प्रलय के स्वामी
तमीशं भजे: ऐसे ईश्वर को मैं भजता हूँ
संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और लय - तीनों का एकमात्र आधार वही ओंकार स्वरूप निराकार परमात्मा हैं।
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