कामधेनु गौमाता - EP 24 - मेनका ने की विश्वामित्र की तपस्या भंग | तिलक
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कामधेनु गौमाता - EP 24 - मेनका ने की विश्वामित्र की तपस्या भंग | तिलक
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ऋषि कौशिक पर देवराज इंद्र क्रोधित हो जाते हैं और उन्हें दंड देने की बात कहते हैं। लेकिन गौ माता कामधेनु उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं और ऋषि कौशिक की परीक्षा लेने का सुझाव देती हैं। इंद्र तीनों लोकों में परम सुंदर मानी जाने वाली अप्सरा मेनका को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं। मेनका अपनी मोहक लीलाओं से राजा कौशिक की साधना को प्रभावित करने का प्रयास करती हैं। यह देखकर गौ माता कामधेनु इंद्र को समझाती हैं कि किसी स्त्री का उपयोग करके ऋषि की साधना भंग करना धर्मसम्मत नहीं है। वह ऋषि कौशिक के महत्व को बताते हुए कहती हैं कि यही कौशिक आगे चलकर महर्षि विश्वामित्र बनेंगे और भगवान श्रीराम की लीलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उनकी साधना में बाधा डालना केवल एक ऋषि का नहीं, बल्कि संपूर्ण धर्म का अपमान है। गौ माता की बातों से इंद्र अपनी भूल स्वीकार करते हैं और भविष्य में उनकी साधना में बाधा न डालने का वचन देते हैं।
Indra becomes angry with Rishi Kaushik and wants to punish him. However, Gau Mata Kamdhenu stops Indra and suggests testing the sage instead. Indra sends Menaka, the most beautiful celestial dancer, to disturb Kaushik’s tapasya. Seeing this, Kamdhenu tells Indra that using a woman to break a sage’s penance is against dharma. She explains that Kaushik will one day become Rishi Vishwamitra and play an important role in Lord Shri Ram’s life. She warns Indra that disturbing his penance is an insult to both the sage and dharma itself. Realising his mistake, Indra promises Kamdhenu that he will never disturb Kaushik’s tapasya again.
"जो समुद्र मंथन से प्रकट हुए 14 रत्नों में से एक हैं, श्रीकृष्ण के हृदय में विराजमान हैं, मनवांछित वर प्रदान करती हैं, दुष्टों का संहार और संतों का उद्धार करती हैं तथा ऋषि-मुनियों की पूजनीय हैं, वह हैं माता कामधेनु! माता कामधेनु सृजन, समृद्धि और कल्याण की देवी हैं। समुद्र मंथन से प्रकट होकर उन्होंने समस्त लोकों के पालन-पोषण का दायित्व संभाला। उनका महात्म्य ऐसा है कि वे भगवान श्रीकृष्ण से लेकर ऋषि-मुनियों तक के हृदय में युगों-युगों से विराजमान हैं। माता कामधेनु की कृपा से जीवन में सौभाग्य के बंद द्वार खुल जाते हैं। माता कामधेनु की यह महागाथा उनके मातृत्व की ममता, महिमा और दिव्यता का प्रतिबिंब है।
यह शो मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रंथों पर आधारित है—
गौ अंक
हरिवंश पुराण
विष्णु पुराण
गरुड़ पुराण
श्रीमद्भागवत महापुराण
ब्रह्मवैवर्त पुराण
स्कंद पुराण
शोध
श्रीकांत विश्वकर्मा
विनय द्विवेदी
कहानी
प्रेम सागर एवं शिव सागर
पटकथा
श्रीकांत विश्वकर्मा
संवाद
विनय कुमार
संगीत
सूर्य राज कमल
शीर्षक गीत
सतीश देहरा
बैकग्राउंड संगीत
लेनिन नंदी
गीतकार
सुरेश तिवारी
पोस्ट हेड
रॉबिन शर्मा
क्रिएटिव डायरेक्टर
शिव सागर
एसोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर
अभिषेक चौबे
छायांकन निर्देशक (डीओपी)
प्रकाश जनार्दन शिंगाड़
द्वितीय इकाई निर्देशक
धवल दर्जी
निर्देशक
राकेश रामनलाल व्यास
निर्माता
प्रेम सागर
नीलम सागर
शिव सागर
सेलेक्ट मीडिया होल्डिंग्स
कलाकार
हरलीन कौर — गौ माता कामधेनु
विशाल नायक — कृष्ण
नेहा परदेशी — राधा
अनमोल सोनी — महादेव
संदीप मोहन — वशिष्ठ
सुगंधा — अरुंधती
प्रियांशी रघुवंशी — पार्वती
ज्ञानेश्वर कुमार राय — ब्रह्मा
रोहित देवड़ा — इंद्र
अलिका नायर — शची
आकाश सिसोदिया — बलि
शुभम सेहरावत — विश्वरथ
हरमिंदर कौर — विश्वरथ की पत्नी
मनदीप कौर — गंगा
शेखर मेहता — शांतनु
देवानंद पाठक — परशुराम
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