विवाह द्वार से लौटती बारात: भगवान नेमिनाथ और राजुल की करुणा व वैराग्य की अमर कथा
JAIN SUTRA
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विवाह द्वार से लौटती बारात: भगवान नेमिनाथ और राजुल की करुणा व वैराग्य की अमर कथा
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जय जिनेंद्र / नमो नमः 🙏
इस पावन और भक्तिमय कथा में सुनिए 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ और राजकुमारी राजुल की अमर गाथा। जब भगवान नेमिनाथ की बारात विवाह मंडप की ओर बढ़ रही थी, तब बेज़ुबान पशु-पक्षियों का आर्तनाद सुनकर उनका हृदय करुणा से भर उठा। अपने उत्सव के लिए हज़ारों निष्पाप जीवों की बलि रोकने हेतु उन्होंने विवाह मंडप के द्वार से ही बारात वापस मोड़ ली और अहिंसा, करुणा तथा वैराग्य का मार्ग चुना।
पवित्र गिरनार पर्वत पर तपस्या कर उन्होंने केवलज्ञान प्राप्त किया और जगत् को जीव दया का अमर सन्देश दिया।
🌸 *कथा के मुख्य प्रसंग:*
नेमकुमार की बारात और विवाह की तैयारियाँ
बेज़ुबान पशु-पक्षियों का क्रंदन और भगवान की परम करुणा
बारात की वापसी और जीवों की मुक्ति
पवित्र गिरनार पर दीक्षा और राजकुमारी राजुल का वैराग्य
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