किरदार बोलते हैं - हर रविवार। कहानी - 'बाबुल'। लेखिका - डॉ. लता अग्रवाल 'तुलजा'@DrLataAgrawal
Dr Lata Agrawal 'Tulja' | डॉ. लता अग्रवाल 'तुलजा'
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किरदार बोलते हैं - हर रविवार। कहानी - 'बाबुल'। लेखिका - डॉ. लता अग्रवाल 'तुलजा'@DrLataAgrawal
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मित्रों,
माँ धरती है तो पिता गगन हैं, दोनों का अस्तित्व समान है।फिर जाने क्यों पिता का त्याग,बलिदान अनचिंहित रह जाता है। जन्मते ही माँ का आँचल छिन जाने पर जिस पिता ने अपनी पूरी जिंदगी बच्ची के नाम होम कर दी हो, उस पिता बलिदान तो रेखांकित होना ही चाहिए न।
तो सुनिएगा ऐसी ही एक कहानी, 'बाबुल ' और अपनी प्रतिक्रिया दीजियेगा।
VC @ECOMiTz