काम अच्छी नीयत से करता हूं, पर अंजाम बुरा आता है (आपके साथ भी ऐसा होता है?) || आचार्य प्रशांत (2024)
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
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काम अच्छी नीयत से करता हूं, पर अंजाम बुरा आता है (आपके साथ भी ऐसा होता है?) || आचार्य प्रशांत (2024)
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वीडियो जानकारी: 05.08.24, प्रश्नोत्तरी सत्र, ग्रेटर नॉएडा
काम अच्छी नीयत से करता हूं, पर अंजाम बुरा आता है (आपके साथ भी ऐसा होता है?) || आचार्य प्रशांत (2024)
📋 Video Chapters:
0:00 - Intro
1:18 - इरादों का महत्व और उनकी व्याख्या
7:16 - तनाव और हार्ट अटैक का संबंध
12:43 - भावनाओं का प्रभाव
17:39 - एक राजा और बंदर की कहानी
20:01 - भावनाओं और विचारों का संबंध
21:31 - कबीर दोहे और भजन
22:46 - समापन
प्रसंग:
~ "The road to hell is paved with good intentions."
~ ऐसा क्यों है कि जितने लोगों को प्यार ने मारा है, उससे बहुत-बहुत कम लोगों को नफरत ने मारा है?
~ हम किस सीमा के बाद सोचना बंद कर देते हैं?
~ ऐसा क्यों होता है कि हम काम अच्छी नीयत से करते हैं, फिर भी अंजाम बुरा आता है?
~ "मैं दिल से बुरा नहीं हूँ" यह कथन कितना सही है?
~ यदि नीयत से सही काम नहीं होते तो फिर किससे होते हैं?
~ ज्ञान और बोध क्यों चाहिए?
~ सबको ऐसा क्यों लगता है कि वे अपनी नजर में अच्छे हैं?
~ सारी बातें आत्मज्ञान के सामने हल्की क्यों हैं?
~ हिटलर भी अपनी नजर में महापुरुष क्यों था?
विवरण
इस वीडियो में आचार्य जी ने "अच्छी intention" और उनके परिणामों पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति अपनी नजर में अच्छा होता है, चाहे उसके कार्य कितने भी गलत क्यों न हों। उदाहरण के लिए, हिटलर ने लाखों यहूदियों की हत्या की, लेकिन वह अपने कार्यों को जर्मन राष्ट्र की सेवा मानता था। आचार्य जी ने यह भी बताया कि लोग अक्सर अपनी गलतियों को छिपाने के लिए "मेरी intention अच्छी थीं" का बहाना बनाते हैं।
आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि intention का कोई महत्व नहीं होता जब तक कि उनके पीछे ज्ञान, चेतना और समझ न हो। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता और बच्चों के रिश्ते को पवित्र माना जाता है, लेकिन फिर भी बच्चे बर्बाद हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि intention के बजाय ज्ञान और समझ की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्यार और intention के नाम पर लोग अक्सर गलत कार्य करते हैं, जैसे कि घर का खाना बनाते समय स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना। आचार्य जी ने यह भी बताया कि भावनाएं अक्सर व्यक्ति को सही निर्णय लेने से रोकती हैं और इसलिए हमें अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।
संगीत: मिलिंद दाते
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