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क्षमावाणी पर्व | क्यों कहते हैं “उत्तम क्षमा” ? मिच्छामि दुक्कडम् | Micchami Dukkadam

Jain Kwiz

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क्षमावाणी पर्व | क्यों कहते हैं “उत्तम क्षमा” ? मिच्छामि दुक्कडम् | Micchami Dukkadam

363 просмотра · 11 дн. назад
Jain Kwiz
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जय जिनेंद्र! दशलक्षण पर्व के बाद आता है क्षमावाणी पर्व — जिस दिन न मिठाई, न उपहार… बस दो हाथ जुड़ते हैं और बोला जाता है “उत्तम क्षमा”। इस वीडियो में जानिए यह पर्व क्या है, क्षमा जैन धर्म में इतनी महत्वपूर्ण क्यों है, और सुनिए भगवान पार्श्वनाथ और कमठ की वह कथा जिसमें दस जन्मों का वैर क्षमा के सामने हार जाता है। इस वीडियो में: • दशलक्षण पर्व और आत्मा के दस धर्म • क्षमावाणी पर्व कब और कैसे मनाया जाता है (आश्विन कृष्ण प्रतिपदा) • क्षमापना पाठ — “खम्मामि सव्व जीवाणं…” का अर्थ • क्षमा वीरस्य भूषणम् — क्षमा कमज़ोरी नहीं, वीरता है • कथा: मरुभूति–कमठ से पार्श्वनाथ–शंबर तक, दस भवों का वैर शिक्षा: द्वेष गिराता है, क्षमा ऊपर उठाती है। वैर को अगले जन्म तक क्या, अगले दिन तक भी मत ले जाओ। जो क्षमा माँगता है वह अहंकार छोड़ता है; जो क्षमा देता है वह क्रोध छोड़ता है। क्षमावाणी पर्व 2026: 26 सितंबर (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर संभव) समय-सूची: 0:00 परिचय 0:28 दशलक्षण पर्व और दस धर्म 1:00 क्षमावाणी के दिन क्या होता है 1:28 क्षमापना पाठ और अर्थ 1:46 क्षमा का महत्व 2:13 क्षमा वीरस्य भूषणम् 2:30 कथा: मरुभूति और कमठ 3:00 वैर का आरम्भ 3:36 हाथी और मुनिराज 4:09 दस भवों का वैर 4:27 पार्श्वकुमार और नाग-युगल 5:00 धरणेंद्र और पद्मावती 5:14 उपसर्ग 5:58 केवलज्ञान और क्षमा 6:15 कथा की शिक्षा आप सभी को उत्तम क्षमा। वीडियो अच्छा लगे तो लाइक करें, परिवार और मित्रों के साथ शेयर करें, और ऐसी ही जैन कथाओं और पर्वों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। #क्षमावाणी #Kshamavani #UttamKshama #दशलक्षणपर्व #Paryushan #JainDharma #Parshvanath #जैनकथा #Jainism #MicchamiDukkadam #जयजिनेंद्र